एनआईटी में धड़ल्ले से चल रहा है अवैध निर्माणों को सील करने व खोलने का खेल, तिकोना पार्क में भी हुई सीलिंग

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एनआईटी क्षेत्र में इन दिनों अवैध निर्माणों को सीलिंग करने व उसे खोलने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। पहले बिल्डिंग सील की जाती हैं और फिर उन्हें खोल दिया जाता है। इस पूरे प्रकरण में लाखों रुपए का खेल हो रहा है। यह लाखों रुपए किसकी जेब में जा रहे हैं, यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है। पिछले कुछ दिनों के भीतर ही वह तमाम अवैध बिल्डिंग सीलिंग से मुक्त हो गईं, जिन्हें भारी पुलिस बल के साए में सील किया गया था। पंरतु बड़ी डील होते ही उनकी सीलिंग को अब खोल दिया गया है।

पिछले दिनों एनआईटी बस अडडे के सामने 1एफ/ 31 और एफ-41 नामक दो ईमारतों को सील किया गया था। पता चला है कि अब इन दोनों ईमारतों की सील खोलने के लिए बड़े पैमाने पर लॉबिंग चल रही है। माना जा रहा है कि डील फाईनल होते ही इन दोनों की सील भी खोल दी जाएगी। इससे पहले एनआईटी नंबर-3 में ईएसआई चौक पर कार्नर में सील की गई एक दुकान को अब खोल दिया गया है। इससे पहले गोल्फ क्लब के पेट्रोल पंप के सामने सील की गई बिल्डिंग में अवैध निर्माण किया जा रहा है। यह सब अधिकारियों की मेहरबानी से हो रहा है।

बुधवार को ज्वाइंट कमिश्नर प्रशांत अटकान ने फिर से सीलिंग का काम शुरू कर दिया। सुबह होते ही वह तिकोना पार्क में केनरा बैंक के साथ करीब दो साल पहले बने निर्माण को सील करने पहुंच गए। ईमारत बनाने वाले ठेकेदार का कहना है कि बिना नोटिस दिए ही इस निर्माण को सील कर दिया गया।

हैरत की बात तो यह है कि जब यह निर्माण बनाया जा रहा था, तब उसे किसी ने देखा तक नहीं। यानि कि बात सीधी सी है कि निर्माण बन रहा हो तब भी उससे पैसे ले लो और जब बन जाए फिर उसे सील कर दो। इसके बाद सील खोलने के नाम पर पैसे बटोर लो। मजे की बात तो यह है कि तोडफ़ोड़ विभाग के कई मौजूदा और पूर्व अधिकारी ज्वाइंट कमिश्नर प्रशांत की कार्यप्रणाली से नाराज चल रहे हैं। उनका कहना है कि वह कमिश्नर से उनकी करतूतों की शिकायत करेंगे।

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