MCF के विज्ञापन विभाग का क्लर्क रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, अवैध निर्माणों को लेकर भी मचा है गदर

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नगर निगम फरीदाबाद के एक क्लर्क को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। नरेंद्र नाम का यह कर्मचारी आऊटसोर्सिंग (ठेका आधार पर) पर विज्ञापन विभाग में नियुक्त है। जिसे शुक्रवार को स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने दबोचा है। यह कर्मचारी अजरौंदा चौक पर स्थित एसीपी आफिस में ही बनें एमसीएफ कार्यालय में नियुक्त था। बताया गया है कि इस कर्मचारी पर विज्ञापन के कार्य में बड़े पैमाने पर रिश्वत लेने का आरोप है। इसके चलते ही उसे विजिलेंस ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

 

1 K/19 तोडऩे के बाद फिर बन गया

इस आदमी ने दी थी शिकायत

बताया गया है कि नगर निगम के अंडर आने वाले पोल पर विज्ञापन लगवाने की एवज में नरेंद्र ने गांव खेड़ी निवासी अमरसिंह से दस हजार रुपए की राशि तय की थी। अमर सिंह ने दो हजार पहले दे दिए और बाकि 8 हजार रुपए बाद में देने के लिए तय कर लिया। इस बीच अमर सिंह ने नरेंद्र की शिकायत स्टेट विजिलेंस ब्यूरो में कर दी। विजिलेंस की टीम ने आठ हजार रुपए के नोटों पर पाऊडर लगाकर अमर सिंह को थमा दिए। जैसे ही यह राशि नरेंद्र को दी गई और अमर सिंह रुपए देकर निकला तो विजिलेंस की टीम ने उसे दबोच लिया। फिलहाल नरेंद्र से इस मामले में गहन पूछताछ की जानी है। शाम को बादशाह खान अस्पताल में उसका मेडीकल चैकअप करवाया गया है।

अवैध निर्माणों में भी है गदर

बताया गया है कि विज्ञापन विभाग में बड़े पैमाने पर गदर मचा हुआ है। विज्ञापन विभाग ही नहीं बल्कि अवैध निर्माणों को लेकर भी निगम में एक तरह से लूट मची हुई है। तोडफ़ोड़ विभाग में नियुक्ति पाने के लिए एसडीओ और बिल्डिंग इंस्पेक्टर बड़ी-बड़ी सिफारिश करवाते हैं। इसके एवज में वह अवैध निर्माणों से लाखों रुपए की उगाही कर उसकी कथित तौर पर नीचे से लेकर ऊपर तक बंदरबांट करते हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो शहर में हर जगह अवैध निर्माण करवाने के ठेके ना छूट रहे होते। ठीक यही हाल विज्ञापन विभाग का भी है। इस महकमे में भी जमकर गदर फंड मचा हुआ है। नीचे से लेकर ऊपर तक कितने बड़े पैमाने पर खेल होते हैं, यह नरेंद्र की रंगे हाथ गिरफ्तारी से सामने आ गया है।

लोगों को विजिलेंस से उम्मीद नहीं

हालांकि इससे पहले भी निगम में रंगे हाथों विजिलेंस द्वारा कई कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पंरतु उसका परिणाम सामने नहीं आ पाता। सभी कुछ ढाक के तीन पात में दबकर रह जाता है। लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई आंखों में धूल झोंकने के अलावा और कुछ नहीं होती। यह मामला भी पिछले प्रकरणों की तरह से दबा दिया जाएगा।

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