विधायक विरोधी जूनियर इंजीनियर को तोडफ़ोड़ विभाग में मिली मलाईदार सीट, कार्रवाई की बजाए उगाही में जुटा

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नगर निगम के तोडफ़ोड़ विभाग में बेशक अधिकारियों की अदला-बदली कर दी गई है, मगर शहर में अवैध निर्माण और उनसे होने वाली वसूली का धंधा बेरोक-टोक जारी है। हैरत की बात है कि तोडफ़ोड़ विभाग में बिल्डिंग इंस्पेक्टर के तौर पर एक ऐसे जूनियर इंजीनियर को तैनाती दी गई है, जोकि ना केवल कांटे्रक्ट पर निगम में कार्यरत है, बल्कि इलाके के विधायक की आंखों में भी किरकिरी की भांति चुभता है। इसके बावजूद आयुक्त ने इस जूनियर इंजीनियर को मलाईदार सीट पर नियुक्ति दे दी है।

अवैध निर्माणों से उगाही का धंधा शुरू

नियुक्ति के साथ ही इस बिल्डिंग इंस्पेक्टर ने शहर में चारों ओर उगाही का धंधा शुरू कर दिया है। जहां देखो वहीं अवैध निर्माण शुरू करवाकर उनसे वसूली करने की दिशा में इस इंस्पेक्टर ने अपनी जिप्सी को घूमा दिया है। चारों ओर से इस बिल्डिंग इंस्पेक्टर की करतूतों की चर्चा होने लगी है। इस बिल्डिंग इंस्पेक्टर के ऊपर एक कांग्रेसी पार्षद का भी ठप्पा लगा हुआ है।

जुगाड़ से पाया यह मलाईदार पद

बताया गया है कि इस बिल्डिंग इंस्पेक्टर ने तमाम जुगाड़ के बाद यह पद हासिल किया है। इसलिए इस पद पर नियुक्ति पाते ही उसने जोरदार तरीके से उगाही का धंधा शुरू कर दिया है। बताया गया है कि शहर में अवैध निर्माण करने वाले ठेकेदार को धमकी देकर ये बिल्डिंग इंस्पेक्टर अपने पास बुला लेता है। फिर उन ठेकेदारों से जोरदार तरीके से उगाही की प्रक्रिया को अमली जामा पहनाया जाता है।

विधायक ने जताई थी इससे नाराजगी

मजे की बात तो यह है कि इस बिल्डिंग इंस्पेक्टर की करतूतों से भाजपा विधायक ने इस कदर नाराजगी जताई थी कि उसे उसके इलाके से हटाना पड़ा था। विधायक के पास लगातार शिकायतें पहुंच रही थीं कि यह जूनियर इंजीनियर सरकार के विरोध में झंडा बुलंद करने वाले लोगों के हाथों में खेलकर सरकार की छवि को धूमिल कर रहा है। हालांकि विधायक ने उसे अपनी कार्यप्रणाली सुधारने का पूरा मौका भी दिया था, मगर वह नहीं माना। जिसके चलते कांग्रेस पार्षद के वार्ड से उसे हटवा दिया गया था।

सरकार विरोधी जेई को मिला बड़ा पद

विधायक व सरकार विरोधी इस जूनियर इंजीनियर को अब तोडफ़ोड़ विभाग में नियुक्ति देकर मलाई खाने का पूरा और बड़ा मौका दिया गया है। इस बड़े अवसर पर यह बिल्डिंग इंस्पेक्टर किसी भी सूरत में खोना नहीं चाहता। यही वजह है कि अवैध निर्माणों की शिकायतों पर कार्रवाई करने की बजाए वहां से उगाही के धंधे में यह जुट गया है। इस बिल्डिंग इंस्पेक्टर के ऊपर नियुक्त एसडीओ भी खुली आंखों से सारा तमाशा देख रहा है। बताया गया है कि ये एसडीओ भी किसी और अधिकारी के हाथों का खिलौना बनकर इस शहर को अवैध निर्माणों की भठ्ठी में झोंक रहा है।

 

 

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