स्व: वाजपेयी का नाम कैसिंल कर दोबारा से सरकारी अस्पताल का नाम हो सकता है बादशाह खान

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Faridabad News (citymail news) फरीदाबाद के सबसे पुराने सरकारी अस्पताल बादशाह खान का नाम बदलने के बाद से शहरवासी बेहद हैरान हैं। इसके विरोध में लोग सामने आकर सरकार से इसका पुराना नाम ही रखने की मांग कर रहे हैं। हाल ही में पूर्व मेयर अशोक अरोड़ा ने बादशाह खान अस्पताल का नाम ना बदलने की मांग को लेकर जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। वहीं पूर्व मंत्री एसी चौधरी ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से नाम बदलने की अपील की। सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता अनीशपाल, युवा कांग्रेस नेता गौरव चौधरी तथा कांग्रेस नेता भरत अरोड़ा
ने भी इस मुद्दे पर सरकार से नामकरण प्रक्रिया को रोकने की मांग की है। वहीं बडख़ल विधानसभा क्षेत्र की विधायक सीमा त्रिखा ने इस मुद्दे पर स्टैंड लेते हुए सीएम को फरीदाबाद के लोगों की भावनाओं से अवगत करवाया।

यूटर्न ले सकती है सरकार-

बताया गया है कि लोगों के विरोध को देखते हुए प्रदेश सरकार इस मामले में यूटर्न ले सकती है। खबर आ रही है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल बादशाह खान अस्पताल के नाम को लेकर पुर्नविचार कर रहे हैं और जल्द ही इस अस्पताल का नाम दोबारा से बादशाह खान ही किया जा सकता है।

स्वर्गीय वाजपेयी के नाम पर कर दिया था नामकरण-

बता दें कि हाल ही में प्रदेश सरकार ने फरीदाबाद के सरकारी बादशाह खान अस्पताल का नाम बदलकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर कर दिया है। इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया। यह जानकारी सामने आते ही लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। खासतौर पर कांग्रेस ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। वहीं भाजपा के विधायक भी इस मामले को लेकर सीएम से बात करने लगे।

विधायक सीमा ने किया हस्तक्षेप-

भाजपा विधायक सीमा त्रिखा ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए सीएम से अस्पताल का नाम दोबारा से बादशाह खान के नाम पर ही करने की मांग की। बताया गया है कि फरीदाबाद के लोगों की भावनाओं के अनुुरूप सरकार जल्द ही अस्पताल का नाम फिर से बादशाह खान कर सकती है। इसे लेकर जल्द ही सरकार द्वारा अपना पुराना नोटिफिकेशन रद्द कर सकती है और नाम खान अब्दुल गफ्फार खान के नाम ही बहाल कर सकती है ।

कौन थे अब्दुल गफ्फार बादशाह-

ख़ान अब्दुल गफ़्फ़़ार बादशाह ख़ान  7 फुट लम्बे कद के थे और एक सलवार, कमीज व अगौछा अपनी पोटली में लेकर चलते थे और पूरा जीवन उन्होंने संघर्ष में गुजारा और अंग्रेजी हकूमत के खिलाफ जमकर लड़ाई लड़ी, जिसके चलते अंग्रेज उनसे घबराते थे।  बंटवारे के दौरान उन्होंने पाकिस्तान से आए 6 जिलों के लोगों को यहां बसाया  था और उनके सम्मान में ही इस अस्पताल का नाम रखा गया था ।

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