Faridabad- विजिलेंस टीम ने शुरू की 108 करोड़ रुपए की सडक़ परियोजना की जांच, गायब रहे अधिकारी और ठेकेदार

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फरीदाबाद। शहर की प्रमुख पेरीफेरी सडक़ परियोजना की जांच स्टेट विजिलेंस ब्यूरो द्वारा आरंभ कर दी गई है। विजिलेंस ब्यूरो के एक्सईएन नीरज शर्मा के नेतृत्व में टीम ने सडक़ों के सैंपल कलेक्ट किए। बीके चौक सहित इस परियोजना के बाकि कई हिस्सों से भी सडक़ निर्माण सामग्री के सैंपल लिए गए हैं। हैरत की बात है कि स्टेट विजिलेंस की जांच के दौरान जहां शिकायतकर्ता के पुत्र विष्णु गोयल मौजूद रहे, वहीं नगर निगम के अधिकारी व ठेकेदार जांच में शामिल होने के लिए पहुंचे ही नहीं।

बड़ी मुश्किल से जांच में पहुंचा जूनियर इंजीनियर-

विजिलेंस टीम ने जब जांच में किसी अधिकारी के शामिल ना होने की शिकायत निगम के उच्च अधिकारियों से की तो बड़ी मुश्किल से एक जेई स्तर का अधिकारी ही पहुंचा। इस अधिकारी ने भी जांच टीम द्वारा लिए गए सैंपल पर साईन करने में आनाकानी दिखाई, मगर जब इस बात की शिकायत दोबारा से उच्च अधिकारियों से की गई तो जेई साईन करने पर सहमत हुआ। बता दें कि यह सडक़ आर.के. गांधी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा बनाई गई है।

परियोजना में हैं तमाम खामियां-

इस कंपनी पर आरोप है कि 108 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जाने वाली इस सडक़ में तमाम खामियां हैं। निर्माण सामग्री में हेरफेर करने के साथ साथ नीलम से बाटा चौक तक की सडक़ को तारकोल की बजाए सीमेंट से बना दिया गया। जबकि वर्क आर्डर में यह सडक़ तारकोल से बनाने के आदेश हैं। हालांकि यह बदलाव किया जा सकता है, मगर इसके लिए दोबारा से टेंडर प्रक्रिया को अमल में लाना पड़ता है। मगर निगम अधिकारियों ने तमाम कायदे कानूनों को ठेंगा दिखाकर दोबारा से टेंडर किया ही नहीं। इसके अलावा वर्क आर्डर में जो भी काम थे, वह पूरे नहीं किए गए हैं। इस सडक़ परियोजना की अधिकांश पेमेंट ठेकेदार द्वारा ले ली गई है। मगर बहुत सा काम आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। निगम की इंजीनियरिंग शाखा के एक पूर्व अधिकारी के सरंक्षण में ही यह पूरा काम होने की शिकायत भी विजिलेंस ब्यूरो से की गई है। देखना अब यह है कि विजिलेंस की इस जांच में कुछ तथ्य सामने आ पाते हैं या फिर बाकि जांच की तरह से इसे भी ठंडे बस्ते में डलवा दिया जाएगा।

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