Wednesday, July 28, 2021

बच्चों को भारी भरकम स्कूल बैग उठाने से मिला छुटकारा , अब स्कूलों में लगानी होंगी वजन तोलने वाली मशीन

Must Read

बंगाल की खाड़ी में बन रहा कम दबाव, नतीजतन दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और मुंबई में होगी भारी बारिश

नई दिल्ली। मौसम विभाग ने लोगों को आगाह किया है कि दिल्ली-एनसीआर सहित हरियाणा, पंजाब और उत्तर तथा पूर्वी...

जानिए इस IAS की प्रेरणादायक कहानी, मां-बाप बचपन में छोड़ गए, मेहनत मजदूरी कर बन गए बड़े अफसर

नई दिल्ली। मुश्किलें कड़ा इम्तिहान लेती हैं। इस इम्तिहान में सिर्फ वही लोग पास हो पाते हैं जो कड़ी...

खुले मैडल विजेता चानू की किस्मत के दरवाजे, ASP बनाने के साथ गिफ्ट में मिले 1 करोड़, हो गई बल्ले-बल्ले

नई दिल्ली। टोक्यो ओलंपिक में देश की चांदी करने वाली मीराबाई चानू सोमवार को भारत लौट आई। इस सिल्वर...
New Delhi News (citymail news) स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को भारी भरकम बस्ते से  राहत मिल गई है। केंद्रीय शिक्षा विभाग ने अपनी नीति में बड़ा बदलाव किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बच्चों की इस मुश्किल पर भी ध्यान दिया गया हैै। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्कूल बैग पर अपनी नई नीति में दूसरी कक्षा तक गृह कार्य नहीं देने, स्कूलों में वजन करने वाली डिजिटल मशीनें रखने और परिसर में पेय जल उपलब्ध कराने जैसी सिफारिश की हैं। साथ में पहियों वाले बैगों पर रोक लगाने की भी अनुशंसा की है।
स्कूल बैग का भार 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए-
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप की गई सिफारिशों में कक्षा एक से 10वीं तक के विद्यार्थियों के स्कूल बैग का भार उनके शरीर के वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। इसमें कहा गया है कि इस क्षेत्र में किए गए शोध अध्ययन के आधार पर स्कूल बैग मानक भार को लेकर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की सिफारिश है और यह सार्वभौमिक तौर पर स्वीकार की जाती है।
स्कूल में हो वजन तौलने की मशीन-
स्कूलों से कहा है गया है कि वे वजन करने वाली डिजिटल मशीनें विद्यालय परिसर में रखें और नियमित आधार पर स्कूल के बैग के वजन की निगरानी करें। नीति दस्तावेज में कहा गया है कि पहिये वाले बैग पर रोक लगनी चाहिए क्योंकि सीढ़ियां चढ़ते वक्त यह बच्चे को चोटिल कर सकते हैं। उसमें कहा गया है कि स्कूलों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि जो सुविधाएं उन्हें अनिवार्य रूप से प्रदान करनी चाहिए, विद्यालय उन्हें पर्याप्त मात्रा और अच्छी गुणवत्ता में उपलब्ध कराएं जैसे मध्याह्न भोजन ताकि बच्चे घर से टिफिन जैसे सामान लेकर नहीं आएं।
सिर्फ 2 घंटे का हो होमवर्क-
नीति दस्तावेज में कहा गया है कि स्कूल या कक्षा के समय को लचीला बनाने की जरूरत है और बच्चों को खेल एवं शारीरिक शिक्षा तथा स्कूलों में पाठ्य पुस्तकों के अलावा किताबें पढ़ने का पर्याप्त समय दिया जाए। नीति में कहा गया है कि दूसरी कक्षा तक कोई गृह कार्य नहीं दिया जाए और नौवीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को रोजाना अधिकतम दो घंटे का गृह कार्य दिया जा सकता है। इसमें कहा गया है कि तीसरी, चौथी और पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों को हफ्तें में अधिकतम दो घंटे का गृह कार्य दिया जा सकता है। छठीं से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को अधिकतम एक घंटे का गृह कार्य दिया जाना चाहिए।
- Advertisement -
- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Connect With Us

223,344FansLike
3,123FollowersFollow
3,497FollowersFollow
22,356SubscribersSubscribe

Latest News

बंगाल की खाड़ी में बन रहा कम दबाव, नतीजतन दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और मुंबई में होगी भारी बारिश

नई दिल्ली। मौसम विभाग ने लोगों को आगाह किया है कि दिल्ली-एनसीआर सहित हरियाणा, पंजाब और उत्तर तथा पूर्वी...
- Advertisement -

More Articles Like This

- Advertisement -
Do NOT follow this link or you will be banned from the site!