दादा को किसान आंदोलन में लगी चोट, समर्थन देने अमेरिका छोड़ भारत पहुंचा पोता

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Screen short bbc.com
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New Delhi: दादा के प्रति पोते का प्रेम यूं तो आपने अपने घर में भी देखा होगा। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे पोते की कहानी बताने जा रहे हैं,जो विदेश छोड़ भारत इसलिए पहुंचा क्योंकि उसके दादा एक किसान हैं. और इस वक्त किसान आंदोलन में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। भूमिका शब्द का इस्तेमाल इसलिए किया गया है, क्योंकि वह आंदोलन के दौरान चोटिल होने के बाद भी वापस नहीं गए। बल्कि अन्य किसानों की तरह केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे हैं। अब इस किसान का पोता अमेरिका से भारत पहुंचा है,. और घर जाने के बजाय सीधा अपने दादा के पास किसान आंदोलन में पुहंच गया है। अमेरिका से भारत लौटे प्रतीक चहल खुद को एक स्टूडेंट हैं, वह कहते हैं कि अंबाला में जब पुलिस और किसानों की बीच कहासुनी हुई तो पुलिस की बैरिकेट से उनके दादाजी को चोट लगी थी। जिसकी खबर पाते ही वह अमेरिका छोड़ भारत लौटे हैं. उन्होंने कहा कि उनके दादा 80 साल के बुर्जुग है। वह किसानों की हक के लिए आंदोलन में हिस्सा ले सकते हैं, तो हम क्यों नहीं।

किसान की वजह से ही अमेरिका जा सका
प्रतीक चहल ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं, और किसानों के सहयोग की वजह से ही मैं विदेश पढऩे के लिए जा सका। उन्होंने कहा कि पूरा देश किसानों की ओर देख रहा है। किसानों की मांग एक दम जायज है। मुझे लगता है कि केंद्र सरकार को हमारी मांग माननी चाहिए। उन्होंने कहा कि 3 दिसंबर को केंद्र सरकार के साथ किसान नेताओं की बैठक है। उम्मीद है कि सरकार हमारी मांग पूरी करेगी।

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