हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं से की जा रही है ठगी, इस तरह से लुट रहे हैं लोग, जानिए क्या है पूरा मामला

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सभी बिल एक महीने में तो बिजली का बिल दो महीने में क्यों? हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने इसके पीछे सरकार का आम लोगों के साथ ठगी करना बताया है। मंच का कहना है कि अगर एक महीने के हिसाब से बिल आएगा तो उपभोक्ता की जेब से कम पैसे जाएंगे। अगर दो महीने में बिल आया तो बिल की आखिरी रीडिंग का रेट पर यूनिट ज्यादा हो जाता है और बिल की रकम भी ज्यादा हो जाती है।
यह खुल्लम-खुल्ला लूट है-
 मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि मीटर की रीडिंग 150 यूनिट तक 2 रुपए, 400 रीडिंग हो जाने पर 2 रुपए यूनिट और 500 से 800 यूनिट होने पर 6 रुपए यूनिट के हिसाब से बिल भेजा जाता है। अगर एक महीने के बाद बिल आएगा तो नार्मल लोगों का बिल 300 यूनिट तक 600 रुपए आएगा। दो महीने बाद बिल आया तो 600 यूनिट का बिल 600 & 6 = 3600/- रुपए आयेगा। यह खुल्लम-खुल्ला लूट है। मंच इस लूट का विरोध करता है और मुख्यमंत्री व बिजली मंत्री से मांग करता है कि वह बिजली विभाग को एक महीने के हिसाब से बिल देने का आदेश पारित करे।
1 महीने का बिल देने में बिजली विभाग को क्या परेशानी है-
मंच ने सांसद व विधायकों  से भी इस विषय पर उपभोक्ता को राहत पहुंचाने को कहा है। कैलाश शर्मा ने कहा है कि अब तो डिजिटल बिल तुरंत मीटर की रीडिंग लेकर के दे दिया जाता है तो फिर 1 महीने का बिल देने में बिजली विभाग को क्या परेशानी है। मंच में सभी सामाजिक संगठनों, संस्थाओं व आरडब्लूए के प्रतिनिधियों से भी कहा है कि वे बिजली विभाग की इस चालाकी को समझें और सरकार पर दबाव डालें कि वह 1 महीने की रीडिंग के आधार पर बिजली का बिल उपभोक्ता को प्रदान कराने की कार्रवाई करे।

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