कम उम्र में शादी होने से मां का सपना रहा अधूरा, आईएएस बन बेटे ने कि या सपना पूरा

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New Delhi: मां पढऩा चाहती थी। लेकिन कम उम्र में शादी कर दी गई। जिससे आगे की पढ़ाई वह कर न सकी। इधर चार बच्चों को पालने का जिम्मा भी आ गया था। लेकिन मां के अधूरे सपने को बेटे ने आईएएस बन पूरा कर दिया है। जी हां आज हम बात करेंगे एक ऐसे आईएएस अ्रफसर की जिन्होंने अपने जीवन में कड़ा संघर्ष कर ये मुकाम हासिल किया है। हालांकि इस सफलता के पीछे उनका परिवार भी है, जिन्होंने हर पल अपने बेटे का साथ दिया, खासतौर पर उनकी मां ने जिन्होंने उन्हें 10वीं तक खुद पढ़ाया। क्योंकि घर के हालात इतने खराब थे कि वह बाहर जाकर ट्यूशन नहीं ले सकते थे। जिस अफसर की बात हो रही है, उनका नाम है अजहरुद्दीन जहिरुद्दीन काजी। यह महाराष्ट्र के गांव यवतमाल के रहने वाले हैं। अजहरुद्दीन साल 2020 बैच के आईएएस अफसर बने हैं। उन्होंने साल 2019 के यूुपीएससी परीक्षा में 315 रैंक लाकर सफलता हासिल की है। हालांकि अजहरुद्दीन बताते हैं कि एक वक्त ऐसा भी था जीवन में जब लगा मैं आईएएस के लिए नहीं बना हूं।

बचपन में आई कई कठिनाई

अजहरुद्दीन बताते हैं कि उनकी मां की कम उम्र में शादी कर दी गई। वह घर में सबसे बड़े बेटे हैं। उनसे तीन छोटे भाई है। छह लोगों का एक परिवार है। तीनों भाई के पढ़ाई का जिम्मा भी उन्होंने खुद ले रखा है। वह बताते हैं कि उनकी मां ने 10वीं तक पढ़ाया है। आगे की पढ़ाई उन्होंने कॉमर्स विषय लेकर किया। स्नातक की पढ़ाई के बाद वह एक प्राइवेट जॉब भी कर रहे थे। हालांकि इस बीच उनके घर के हालात ठीक नहीं थे। तीनों भाईयों की पढ़ाई भी अधर में थी। साल 2010 में वह दिल्ली गए।

दिल्ली गए यूपीएससी परीक्षा पास करने , बने बैंक पीओ

अजहरुद्दीन बताते हैं कि वह एक बार किसी कार्यक्रम में एक आईपीएस मिले। जिसने उन्हें काफी प्रभावित किया। उन्होंने साल 2010-11 में दो बार यूपीएससी परीक्षा दी। लेकिन वो सफल न हो सके। वहीं घर के हालात लगातार खराब हो रहे थे। जिसके बीच अजहरुद्दीन को लगा कि वह आईएएस के लिए नहीं बने हैं। इसके बाद वह बैंक पीओ की परीक्षा पास कर बैंक सेक्टर में जॉब करने लगे। लेकिन कहते हैं ना उनका मन आईएएस की तरफ ही था। उन्होंने बैंक मनेजर की नौकरी छोड़ दिल्ली आए। यहां पर सात साल बाद तीसरा प्रयास किया, जिसमें वह सफल नहीं हो सके। हालांकि चौथे प्रयास में उन्हें सफलता मिली। अब वह एक आईएएस अफसर हैं।

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