Friday, August 6, 2021

पिता ने बेटे से छुपाई यह गंभीर बात, जिसकी वजह से रिक्शा चालक का बेटा बना आईएएस अफसर

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New Delhi: राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा। अब जो हकदार होगा वहीं राजा बनेगा। फिल्म सुपर-30 में फिल्म अभिनेता ऋतिक रोशन के द्वारा कहे गए यह डायलॉग आईएएस अफसर गोविंद जयसवाल के जीवन पर सटीक बैठती है। गोविंद जयसवाल के पिता रिक्शा चलाने का काम करते थे। बेटे को किसी तरह से पढ़ाई में दिक्कत न हो, इसलिए गोविंद के पिता ने उन्हें पढ़ाई के दौरान एक गंभीर बात नहीं बताई थी। पिता को यह लगा कि अगर वह बेटे को वह गंभीर बात बता देंगे तो हो सकता है कि दिल्ली पढऩे गया बेटा सबकुछ छोडक़र वापिस आ जाएगा। बेटे को समय पर पैसे भेजने की चिंता में गोविंद के पिता लगातार रिक्शा चलाते थे। जिससे उनके पैर में घाव हो गया था। उनके आस पास के लोग बताते हैं कि वह पूरे दिन दर्द से तड़पते थे। रात को खाने के दौरान वह कहते थे कि दो रोटी ज्यादा खाऊंगा तो बेटे को समय पर पैसे कैसे भेज पाऊंगा। पिता के इस लंबे संघर्ष का परिणाम यह निकला कि गोंविद जयसवाल ने साल 2017 में पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली। वह अब 2007 बैच के आईएएस अफसर हैं। हालांकि गोविंद के पिता अब ठीक रुप से नहीं सुन पाते हैं।

वाराणसी के रहने वाले हैं गोविंद जयसवाल , ऐसा रहा संघर्ष
गोविंद के अफसर बनने से पहले पूरा परिवार काशी के अलईपुरा में 10/12 की एक छोटे से कमरे में रहता था। हालांकि अफसर बनने के बाद बेटे ने पिता को एक मकान खरीद कर दिया। लेकिन परिवार के लोग उसी मकान में रहते हैं,. जहां से गोविंद के पिता ने अपनी बेटियों का विवाह और गोविंद को दिल्ली अफसर बनने भेजा था। वह इस घर को लकी मानते हैं, जिसके लिए आज भी हर महीने अफसर बेटा पैसे भेजता है। जानकार बताते हैं एक वक्त गोविंद के पिता के पास 35 रिक्शे थे। लेकिन बेटियों की शादी में अधिक रिक्शे बिक गए। बेटे की पढ़ाई में दिक्कत न हो इसलिए पिता ने अपनी इकलौती जमीन भी बेच डाली।

source dainik bhaskar

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