किसानों के लिए दाल-चावल से लेकर छोले भटूरे बना रहे हैं दिल्ली के लोग

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image source-ANI repristination
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केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि कानून के विरोध में दिल्ली के सिंधु बॉर्डर पर डेरा जमाए बैठे किसानों का कहना है कि सरकार से हम अपनी बात मनवाकर ही घर लौटेंगे. ​प्रदर्शनकारी किसान 6 महीने का राशन भरकर अपने साथ लाए हैं, इनका कहना है कि हमें खाने—पीने की कोई टेंशन नहीं है. इस काले कानून को मोदी सरकार को वापस लेना ही होगा. किसान आंदोलन का छठवां दिन है. दिल्ली को चारों तरफ से घेरने वाले इन अन्नदाताओं की मदद के लिए आम आदमी भी आगे आए हैं. लोग इनकी मदद के लिए अपने घर से खाना बनाकर ला रहे हैं. कुछ एनजीओ ने तो बूढ़े किसानों के लिए हेल्थ चेकअप कैंप भी लगवाया है.

किसानों के प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए कई नेता भी धरनास्थल पर आ रहे हैं. किसानों ने कहा कि ये हमारी लड़ाई, हम किसी राजनेता को यहां से भाषण नहीं देने देंगे. किसान के सुबह का नाश्ता चाय और पराठे के साथ होता है. ये लोग खाने में हलवा, खीर दाल—चावल और कभी छोले भटूरे और कुल्चे खाकर भी अपना पेट भरते हैं. गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी भी इनके खाने के लिए लंगर लगाती है. किसानों का कहना है कि हम अपना खाना खुद से भी बना लेते हैं. हम यहां ड्यूटी पर कार्यरत पुलिसकर्मियों को भी खाना खिला देते हैं.

हालांकि किसानों के प्रदर्शन का असर केंद्र सरकार पर पड़ने लगा है. अमित शाह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर 35 किसान नेताओं से बातचीत करेंगे. किसानों को एमएसपी रेट को लेकर दिक्कत है. बताया जा रहा है कि सरकार के साथ बातचीत सफल रही तो ​आंदोलन जल्द ही खत्म कर दिया जाएगा.

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