पिता करते हैं मजदूरी, बेटी ने हासिल की बीडीएस सीट, बनेंगी डॉक्टर

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New Delhi: कोयंबत्तूर में 18 साल की आर.स्वेथा पैकियम ने कड़़ी मेहनत कर एक निजी कॉलेज में बीडीएस सीट हासिल की है। स्वेथा की इस कामयाबी पर उनके पिता काफी खुश हैं। अब खुश हो भी क्यो न, इस दिन के लिए तो उनके पिता रोजाना दिहाड़ी मजदूर का काम करते थे। वह हमेशा यह कोशिश करते थे कि उनकी बेटी को पढ़ाई के दौरान किसी भी किताब की कमी न हो। स्वेथा खुद बताती हैं कि उनके पिता दिहाड़ी मजदूर का काम करते हैं, और उन्होंने किताबें खरीद कर दी। क्योंकि नीट की ऑनलाइक क्लासेज के लिए वह स्मार्टफोन नहीं खरीद सकते थे। बताते चले कि मेडिकल काउंसलिंग के 2020-21 के पहले फेज में कुछ सीटे सरकारी स्कूल में पढऩे वाले छात्रों को 7.5 फीसदी होरिजेंटल कोटा के तहत दी गई। आर. स्वेथा पैकियम ने एक निजी कॉलेज में बीडीएस की सीट हासिल की। खास बात यह है कि सरकारी स्कूल में पढऩे वाली स्वेथा ने नीट परीक्षा 2020 में 720 अंकों में से 142 अंक लिए। मजे की बात यह है कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के इतने नंबर लिए हैं।

स्वेथा की कॉलेज की फीस भरेंगे उनकी स्कूल की प्रिंसिपल

स्वेथा के स्कूल की प्रिंसिपल पालानिअयमाल ने बताया कि स्वेथा ने डेंटल कॉलेज की एक सीट हासिल करने में कामयाबी हासिल की है। उन्होंने कहा कि हम पैसा जोड़ रहे हैं, साथ ही अब तक हमने 46 हजार रुपये जमा कर लिया है। स्वेथा के परिवार को पैसे दे दिए हैं। यह पैसे स्वेथा को मदद आएंगे जब वह चैन्नई काउंसलिंग के लिए जाएगी।

क्या कहा स्वेथा ने

स्वेथा ने कहा कि स्टेट की सरकार ने हम जैसे छात्रों की स्कूल फीस माफ कर हमे काफी सहयोग किया है। उन्होंने कहा कि मेरी सभी शिक्षकों की मेहनत की वजह से मेंने बीडीएस सीट हासिल किया है। उन्होंने कहा शिक्षकों के बाद किसी को मेरी सफलता का सारा श्रेय जाता है तो वह हैं मेरे पिता। स्वेथा ने कहा कि अगर मेरे पिता मुझे किताबे खरीद कर नहीं देते तो मैं नीट पास नहीं कर पाती। source by the new indian express

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