दो महिलाओं के जीवन का है मिशन,100 लोगों के जीवन में आई रोशनी

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photo source the new indian express
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New Delhi: कुछ भी असंभव नहीं है। बस काम करने की चाह होनी चाहिए। फिर देखिए सबकुछ मुमकिन होगा। आज की कहानी दो ऐसी महिलाओं की है, जिन्होंने अपने जीवन के मिशन को नेत्रदान से जोड़ लिया। और लोगों को नेत्रदान करने के लिए प्रेरित करने लगी। खास बात यह है कि इस काम को करते हुए उन्होंने 100 से ज्यादा नेत्रहीन लोगों को दोबारा रौशनी दी। लगभग एक दशक से यह दोनों महिलाएं इस नेक काम को कर रही हैं। जिला कडपा में बी मधुसुधन रेड्डी और एम राजू घर-घर जाकर लोगों को आंख डोनेट करने के लिए जागरूक करती हैं। इससे उन लोगों के जीवन से अंधेरा दूर होता है जो किसी कारण वश देख नहीं सकते हैं। 42 साल की मधुसुधन सामाजिक कार्यकर्ता जो प्रोड्डटूर से आती हैं।

एक आर्टिकल से हुई प्रभावित

मधुसुधन बताती हैं कि वह एक आर्टिकल से काफी प्रभावित हुई जो साल 2008 में प्रकाशित हुई थी। यह आर्टिकल एक व्यक्ति के ऊपर था जो लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करता था। इसके बाद उन्होंने ठान ली कि वह भी लोगों को नेत्रदान करने के लिए प्रेरित करेंगी। उन्होंने इस संदर्भ में कई एनजीओ के साथ संपर्क किया। उन्होंने आई बैंक तकनीशियन कोर्स भी किया। जिसके बाद उन्होंने स्नेहा सेवा समिति साल 2008 में शुरु की। उन्होंने एक घर से दूसरे घर नेत्रदान को लेकर जागरूकता फैलाई।

मेहनत रंग लाई

मधुसुदन की मेहनत भी रंग लाई। एक साल के भीतर ही उन्होंने आंख के 17 जोड़े मिले। इसके बाद यह सिलिसिला जारी रहा। लोगों ने भी मधुसुदन के इस कार्य को सराहा, और शपथ ली कि मौत के बाद उनकी आंखे दान की जाएंगी। अगर किसी की मौत होती थी, मधुसुधन को कॉल किया जाता था। जिसके बाद उनकी आंखे ले ली जाती थी। बताते चले कि हर साल 25 अगस्त से सितंबर 8 तक के बीच नेत्रदान को लेकर जागरूकता प्रोग्राम किया जाता है। इस दौरान साइकिल यात्रा भी निकाली जाती है। हालांकि इस साल जागरूकता रैली सिर्फ कोविड-19 की वजह से नहीं निकाली गई।

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