स्ट्रीट चिल्ड्रन के जीवन में परिवर्तन ने ऐसे किया बदलाव, अब बड़ी कंपनी में करते हैं जॉब

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New Delhi: सडक़ों पर घूम रहे बच्चों को नया जीवन देने का काम कर रहा परिवर्तन। परिवर्तन का मतलब है बदलाव। जी हां आपने ठीक सुना। परिवर्तन एक एनजीओ का नाम है, जो उन बच्चों के जीवन को बदलने का काम कर रहा है, जो बेवजह सडक़ों पर घूमते हैं। यह संस्था इन बच्चों के भविष्य को संवारने का काम कर रही है। साथ ही उन्हें अवसर भी प्रदान कर रही है, जिससे वह अपने जीवन में कामयाब हो सके। दरअसल, इस संस्था से निकलकर तकरीबन 24 बच्चें अब देश की जानी-मानी कंपनियों में काम कर रहे हैं। वहीं कुछ आंध्र प्रदेश की स्टेट परीक्षा में भी शामिल हुए हैं। बताते चले कि साल 2003 में ककिंडा के भास्कर नगर में 50 बच्चों के साथ उन्होंने परिवर्तन एनजीओ की शुरुआत की गई थी।
जानकारी के मुताबिक जिला प्रशासन जब भी किसी बच्चे को रेस्क्यू करती थी तो वह उन्हें इस परिवर्तन एनजीओ को भेज देते थे। जहां उन्हें फ्री में शिक्षा, कपड़े, खाना के साथ दवाईयां दी जाती थी। इसके साथ ही बच्चों की समय समय पर काउंसलिंग भी कराई जाती है।

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परिवर्तन एनजीओ के संरक्षक क्या कहते हैं

डी. सत्या देवी जो इस एनजीओ को चलाने काम करती हैं। उनका कहना है कि जब परिवर्तन शुरू किया था। तब बच्चों की संख्या कम थी। उन्होंने उन बच्चों के बारे में बताया जिन्हें कहीं से रेस्क्यू किया गया था। वह बताती हैं कि संतोष अकेला एक बच्चा जो जिला विजिनाग्राम से भाग कर आया था। वह रेल स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर सोता था। जिसके बाद वह वेंडर का काम करने लगा। उन्होंने बताया कि साल 2003 में इसे परिवर्तन में लाया गया। तीन साल इस एनजीओ में रहने के बाद उसे कुछ स्किल सिखाई गई। अब वह एक छोटी सी अपनी दुकान चलाता है. और अपनी मां व परिवार के साथ खुश है।

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