15 साल से क्यों चिट्ठी पढ़ रहे हैं सोनू सूद, कहा हिम्मत मिलती है

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New Delhi: जरूरतमंद लोगों को कोरोना काल में उनके घर पहुंचाने वाले सोनू सूद जब भी लो फील करते हैं तो वह उन चिट्ठी को पढऩा शुरू कर देते हैं, जिनसे उन्हें हिम्मत और काम करने की ऊर्जा मिलती है। खास बात यह है कि सोनू सूद ने इन चिट्ठियों को लगभग 15 साल से संभाल कर रखे हुए हैं। वो कहते हैं कि मैं इन चिट्ठियों को अपनी अंतिम सांस तक रखूंगा। यह चिट्ठी उन्हें उनकी मां ने लिखे हैं। सोनू कहते हैं कि उनकी मां एक कॉलेज में प्रोफेसर थी। जहां पर वह भी स्टूडेंट रह चुके हैं। उन्होंने कहां कि उनकी मां चाहती थी कि मैं पढ़-लिखकर अच्छा इंसान बन सकूं। और मैंने किया भी ऐसा ही। मैंने इंजीनियर की पढ़ाई पूरी की और इंजीनियर भी बना। लेकिन मुझे लगा कि मैं शायद इंजीनियर के लिए नहीं बना हूं। इसके बाद मैंने मां से कहा कि मुझे एक्टर बनना है। मुझे 1 से डेढ़ साल दे दीजिए। अगर कुछ नहीं बन पाऊंगा तो पिता की शॉप पर उनका बिजनेस संभालूंगा। यहां से एक्टर बनने का सफर शुरू हुआ।

मुंबई में काम मिलना बेहद कठिन रहा

सोनू कहते हैं कि वह मुंबई पहुंचे। लेकिन मुंबई का सफर बेहद कठिन रहा। यहां हर एक ऑफिस में अपनी फोटो देता था। लेकिन किसी को मेरी फोटो पंसद नहीं आती थी। उन दिनों में मुझे ऐसा लगने लगा कि मेरा एक्टर बनने का सपना शायद अधूरा ही रह जाएगा। क्योंकि एक डेढ़ साल तो यूं ही बीत गया था। इसी बीच तमिल भाषा के जानने वाले ने मुझे बुलाया। मुंबई से में चैन्नई पहुंचा। यहां पर विजया वाहिनी स्टूडियो में एक निर्देशक ने कहा कि अपनी शर्ट खोलकर दिखाओं। मेरी बॉडी अच्छी थी, और उन्होंने मुझे अपनी फिल्म के लिए साइन कर लिया। इसके बाद मैंने तमिल, तेलगू कन्नड़ भाषा में फिल्म की। इसके बाद मैंने अपनी पहली फिल्म भगत सिंह के साथ बॉलीवुड में डेब्यू किया। सोनू कहते हैं आज अच्छा लगता है कि मैं सलमान खान, व बॉलीवुड के बाहर भी काम कर रहा हूं। हालांकि अभी सफर पूरा नहीं हुआ आगे और काम यूं ही करते रहना है।

जब मां का देहांत हुआ

सोनू कहते हैं कि उनकी मां का देहांत साल 2007 में हुआ। जब उनकी मां थी तो उन्हें रोजाना फोन करती थी और रोजाना पत्र लिखती थी। इस बीच वह अपनी मां से भी कहते थे कि रोजाना बात तो होती है फिर ये पत्र क्यों। इस पर उनकी मां कहती थी कि फोन का कोई रिकॉर्ड नहीं रहेगा। ये पत्र हमेशा मेरा होने का अहसास कराते रहेंगे। इसलिए सोनू ने अपनी मां के द्वारा लिखे पत्रों को संभाल कर रखा है।

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