मां दर्जी, भाई सिक्योरिटी गार्ड और खुद 10वीं पास, फिर भी 40 थैलेसीमिया मरीज को ढुंढ निकाला, अब रोजाना दवाईयां और पैसे दे रहा

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New Delhi: अनंतपुर में जब भी किसी को मदद की जरूरत पड़ती है तो एक ही नाम लोगों के सामने आ जाता है। वह नाम है वेनजेटी वैंकटरमना रेड्डी। जी हां आपने ठीक सुना। वैंकटरमना कोई बड़े आदमी नहीं बल्कि महज 10वीं तक शिक्षा लेने वाले एक साधारण से व्यक्ति हैं। हालांकि साधारण होने के बाद भी उनकी सोच काफी बड़ी है। उन्होंने अपने संजीवनी ट्रस्ट के तहत 40 थैलेसीमिया मरीज की खोज कर उन्हें नया जीवन प्रदान कराने में सहयोग कर रहे हैं। वह रोजाना इन मरीजों के लिए दवा के साथ जरूरत के हिसाब से कुछ पैसे दे रहे हैं। रेड्डी के इस काम की अनंनतपुर में काफी चर्चा है। बताया जा रहा है कि संजीवनी ट्रस्ट के तहत पिछले 15 साल से जरूरतमंद लोगों की मदद की जा रही है। खासतौर पर वो जो आर्थिक तंगी की वजह से अपना इलाज नहीं करवा पा रहे हैं। यहां रहने वाले एक शख्स चकली अंजी ने बताया कि अगर संजीवनी ट्रस्ट न होता तो वह शायद आज जिंदा न होते। वहीं वेंकटरमना ने मेरी उस वक्त मदद की जिस वक्त मेरे अपनो ने मेरा साथ छोड़ दिया था।

वहीं मारूथी नगर में रहने वाले एक निवासी कहते हैं कि वह सैलून चलाते हैं। उनकी पत्नी को दिल में कुछ समस्या हुई थी। पैसे की तंगी के कारण वह काफी समय तक दवा खरीदने में असमर्थ थे। क्योंकि उनकी पत्नी के लिए दवा की कीमत प्रति महीना 3000 रूपये थी। इसके बाद उन्होंने वेंकटरमना रेड्डी से मदद मांगी, जिसके बाद उनकी पत्नी को हर महीने दवा पहुंचाई जा रही है। इस तरह न जाने कितने ही लोगों की मदद कर उनके जीवन को बदलने का काम कर रहा है संजीवनी ट्रस्ट

जानिए कौन है वेनजेटी वैंकटरमना

वैंकटरमना बताते हैं कि वह एक गरीब परिवार से आते हैं। फिर भी उन्होंने यह कभी नहीं सोचा कि जरूरतमंद लोगों की मदद नहीं करूंगा। वह हमेशा मदद के लिए आगे बढ़ते रहते हैं। 38 साल के वेंकटरमना यू तो कडपा जिले के पोदातपुर में रहते थे। लेकिन वैंकटरमना के जन्म से पहले ही वह सभी अनंतपुर आ चुके हैं। उनकी मां रामालक्ष्मी फैमिली का ध्यान रखने के लिए दर्जी का काम करती थी। वैंकटरमना का भाई सिक्योरिटी गार्ड का काम करता है। बताते चले कि आर्थिक तंगी के कारण वह सिर्फ 10वीं तक शिक्षा ले सके। फिर भी उन्होंने जरूरतमंद की मदद के लिए कभी अपने पैर पीछे नहीं खीचे।

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