रोजाना 5 करोड़ चारकोल की नहीं होगी खपत अगर इस सोलर इस्त्री का हुआ इस्तेमाल

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New Delhi: कहते हैं आज के युवा में वह शक्ति है जिससे उसके लिए असंभव शब्द कुछ मायने नहीं रखता है। आज एक ऐसे ही युवा से आपको रू-ब-रू कराने जा रहे हैं. जिन्होंने अपने आइडिया से अपने शहर का ही नहीं बल्कि बाकी शहरों में रहने वाले लोगों का काम आसान कर दिया है। जो सडक़ो पर इस्त्री का काम करके अपना गुजारा चलाते हैं। अब कोयले के धुएं से नहीं बल्कि सौलर पैनल के तले कपड़े इस्त्री किए जाएंगे। आमतौर पर देखा जाता है कि लोग घरों में कपड़े साफ करते हैं, और फिर इस्त्री। जिसमें कई बार तो कमर दर्द की शिकायत भी आ जाती है। इन्ही समस्याओं को देखते हुए तिरुवन्नमलाई में एक 14 वर्षीय लडक़ी ने इस समस्या का समाधान निकाल लिया है। दरअसल, जब हम देखते हैं कि सडक़ों पर इस्त्री करने वाले लोग होते हैं। जो कोयले व लकड़ी का इस्तेमाल कर कपड़ों पर इस्त्री करते हैं। जो हमारी जलवायु समस्या को बढ़ावा देता है।

कौन है विनीशा उमाशंकर

विनीशा उमाशंकर 14 साल की है और 9वीं क्लास की छात्रा हैं। विनीशा ने एक गहन शोध के बाद सौर इस्त्री गाडिय़ां बनाई है। जिसे चलाने के लिए पांच घंटे की धूप चाहिए। बताते चले कि इस वर्ष विनीशा को इस इस्त्री गाड़ी बनाने के लिए प्रतिष्ठित चिल्ड्रन क्लाइमेट प्राइज से नवाजा गया है। उन्हें 8.64 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी दी गई। गौर करने वाली बात यह है कि अगर इस सोलर इस्त्री का इस्तेमाल किया जाए तो जीवाश्म ईधन के उपयोग को काफी हद तक कम कर सकता है।

ऐसा किया है डिजायन


विनीशा ने इस सोलर इस्त्री गाड़ी के ऊपर सौर पैनल लगाए हैं। जो 100 एमएच बैटरी से लगा हुआ है। बताया जा रहा है कि एक बैटरी को चार्ज करने के लिए 1200 वाट की बिजली की जरूरत पडग़ी। बैटरी को पूर्ण रूप से चार्ज करने के लिए पांच घंटे की जरूरत पड़ेगी। जानकारी के मुताबिक यह सौलर इस्त्री आने वाले समय में बाजारों में उपलब्ध कराया जाएगा।

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