शुभम गुप्ता की कहानी सुनकर आप भी कहेंगे कड़ी मेहनत करने वाले लोगों का अच्छा वक्त जरूर आता है

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New Delhi: हिम्मत, हौसला और जुनून हो तो इंसान कैसी भी परिस्थिति से पार पा सकता है। चाहे आपके सामने कैसी भी परिस्थिति हो, बस अपने आप को कूल रखना है, और खुद से कहना है कि आज अगर बुरा वक्त है तो कल अच्छा समय भी आएगा। अगर आप ऐसा करते हैं तो देखेंगे कि आपके जीवन में अच्छा वक्त जरूर आएगा। बशर्ते कड़ी मेहनत करना न छोड़े। क्योंकि कड़ी मेहनत से ही इंसान सफलता की सीढ़ी चढ़ सकता है। आज एक ऐसे युवा की कहानी आपके साथ साझा कर रहे हैं, जिन्होंने जूते की दुकान से उठकर सबसे कठिन परीक्षा मानी जाने वाली सीविल सेवा को पास कर उन लोगों के लिए एक मिसाल कायम की जो यह सोच कर रह जाते हैं कि सीविल सेवा बहुत कठिन परीक्षा है।

कौन है शुभम गुप्ता

शुभम गुप्ता मूल रूप से जयपुर के रहने वाले हैं. उनके पिता जयपुर में एक जूते की दुकान चलाते थे। उन्होंने सातवीं तक की शिक्षा जयपुर से की। शुभम बचपन के दिनों में पढ़ाई के साथ साथ अपने पिता के साथ जूते की दुकान को भी संभालते थे। बाद में जब उनके पिता काम से महाराष्ट्र आए तो यहां पर मराठी नहीं आने की वजह से उन्हें घर से 80 किलोमीटर की दूरी तय कर पढऩे जाना पड़ता था। वह स्कूल जाने के लिए सुबह पांच बजे ही उठ जाते थे। वहीं घर की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए शुभम के पिता ने एक और दुकान खोल ली। हालांकि शुभम पढ़ाई के साथ-साथ दोनों दुकानों पर समय देने लगे। दुकान पर काम करते हुए उनके जीवन का अधिक समय बीता ओर उन्होंने अपनी शिक्षा भी प्राप्त की।

कड़ी मेहनत जारी रखी

शुभम बचपन से ही ब्राइट स्टूडेंट रहे हैं। 12वीं की शिक्षा के दौरान उन्होंने अच्छे अंक लिए। जिसके बाद उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातक की। इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली का रूख किया। यहां पहुंचकर उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ ईकोनॉमी से मास्टर्स की डिग्री ली। सीविल सेवा की तैयारी उन्होंने ग्रेजुएशन के दौरान से ही शुरू की थी। उन्होंने वर्ष 2015 में पहली बार सीविल सेवा की परीक्षा दी। परंतु वह पास नहीं हो पाए। लेकिन उन्होंने लगातार अपनी पढ़ाई जारी रखी। इसके बाद सीविल सेवा की परीक्षा दी। जिसमें वह सफल रहे और 366वीं रैंक भी आी। लेकिन वह इस परिणाम में संतुष्ट नहीं हुए। हालांकि उनका चयन इंडियन ऑडिट और एकाउंट सर्विस के लिए हुआ।
चौथी बार में छठी रैंक लाकर शुभम का हुआ सपना पूरा
शुभम ने सर्विस छोड़ दोबारा से पढ़ाई जारी की। जिसके बाद उन्होंने साल 2017 में एक बार फिर यूपीएससी की परीक्षा दी। लेकिन इस साल उनका कहीं चयन नहीं हुआ। फिर भी शुभम ने हार नहीं मानी। इस दौरान परिवार का सहयोग भी मिल रहा था। वर्ष 2018 शुभम के जीवन में खुशियां लेकर आया। सीविल सेवा के परिणाम घोषित किए गए। जिसमें शुभम गुप्ता की ऑल इंडिया रैंक छठी रही। बताते चले कि यह उनका चौथा प्रयास था।

 

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