हरियाणा में पड़ गया लड़कियों का अकाल, बीवी ढूंढ़ने बिहार भागे युवा

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खराब लिंगानुपात को लेकर हरियाणा में स्थिति ऐसी हो गई है कि कुंवारे लड़कों ने अपना एक यूनियन तक बना लिया है,जिसका नाम ‘रांडा’ यूनियन हेै. जिंद जिले के कुंवारे लड़कों द्वारा बनाया गया ये यूनियन 2014 लोकसभा चुनाव के समय चर्चा में आया था.बहू दिलाने का वादा करके राजनेताओं ने भी इनसे खूब वोट बटोरे हैं. ​हरियाणा में लड़की दिलाना भी एक चुनावी मुद्दा बन गया है.

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2011 जनगणना के अनुसार ​हरियाणा का लिंगानुपात 879 था जो कि राष्ट्रीय अनुपात 940 से भी कम है. लिंगानुपात में सुधार करने के लिए ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का नारा दिया गया था. लेकिन ये नारा गाड़ियों, सरकारी आॅफिस की दीवारों पर ही चमकती दिखती थी. असल में धरातल पर आज भी बेटियों को कोख में मारने का बिजनेस धड़ल्ले से चल रहा है. खट्टर सरकार के लिए राज्य में लिंगानुपात सुधार करना एक टेढ़ी खीर के समान है. दि प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक लड़के पैदा करने के लिए भी दूसरे राज्यों से लड़कियां मंगवाई जाती हैं. ‘सेल्फी विद डाटर फाउंडेशन’ के एक सर्वे के मुताबिक राज्य में अभी तक 1.30 लाख लड़कियां यहां के कई घरों को रोशन कर चुकी हैं. दूसरे राज्यों से आई इन लड़कियों को मोल की बहूएं कहा जाता है. बिहार, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और हिमाचल की लड़कियों को यहां बहूएं बनाने के लिए लाया जा रहा है. कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद सबसे पहले हरियाणा का जिक्र आया था कि अब कश्मीर से भी बहूएं मंगाई जा सकती हैं.ये लड़कियां अलग संस्कृति और खान-पान होने के बावजूद यहां के रंग में रंग जाती हैं. मोल की बहूओं का व्यापार हरियाणा में खूब फल-फूल रहा है. हज़ार से लेकर लाखों तक में लड़कियों को लड़के वाले खरीद रहे हैं. इस व्यापार में कई बिचौलिये शामिल हैं. आलम यह है कि कई लड़के बहू के लिए अपना जमीन तक बेच रहे हैं. कुछ मामले में लड़कों को धोखा ​भी मिल रहा है, कई लड़कियां उनका सबकुछ लूट कर ले जाती हैं.

शादी के लिए लड़कियों की जात—पात तक नहीं देखी जाती है. हरियाणा के खाप पंचायत को भी दूसरी जात की लड़कियों से शादी करने में कोई गुरेज नहीं हैं. खाप का कहना है कि, ‘म्हारे लड़कों का घर बस जावै’. प्रदेश की खट्टर सरकार की मानें तो 2018-19 में राज्य का लिंगानुपात 914 हो गया है. सरकार का दावा अगर सही है तो ये हरियाणा के लड़कों के लिए ये खुशी का संकेत है कि अब उन्हें घोड़ी पर बैठकर अपने ही राज्य में दूल्हा बनकर जाना होगा.

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