दलितों के बाल काटने पर सेठी का हुआ सामाजिक बहिष्कार, परिवार के साथ आत्महत्या करने की दी चेतावनी

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New Delhi: सैलून में काम करने वाले नाई ने कभी आपके बाल काटने के दौरान आपकी जाति पूछी है। क्या कभी आपने सैलून के नाई की जाति पूछकर ही बाल कटवाए हैं। आप सोच रहे हैं कि ये कौन करता है। अरे भई हम आपको जो बताने जा रहे हैं उसे पढक़र आप भी कहेंगे कि हां आज भी जाति के आधार पर भेदभाव होता है। दरअसल, कर्नाटक के एक गांव में एक नाई को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। इस नाई का नाम है मल्लिकार्जुन सेठी। सेठी का कसूर सिर्फ इतना है कि वह अपने परिवार को चलाने के लिए सैलून की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं, और बीते दिनों पहले उन्होंने एक अनूसूचित-जनजाती के लोगों के बाल काटे हैं। जिसके लिए उसका सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही उस पर दबाव बनाया जा रहा है, कि उसे समाज में वापिस शामिल होने के लिए 50 हजार का जुर्माना देना पड़ेगा।

सेठी ने कहा, परिवार के साथ कर लेेंगे आत्महत्या

मल्लिकार्जुन सेठी ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि उन पर पहले भी तीन बार जुर्माना लगाया गया था। मैंने पहले भी जुर्माना भरा है। लेकिन अब मैं जुर्माना नहीं भरूंगा, और मुझे ज्यादा परेशान किया जाएगा तो मैं परिवार के साथ आत्महत्या कर लूंगा। बताते चले कि सेठी दलितों के बाल काटने के दौरान उनसे ज्यादा पैसे भी नहीं लिया करते थे। जानकारी के मुताबिक बैंगलोर के एक शक्स द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है। जिसे सेठी काफी परेशान है। उसने प्रशासन को इस बाबत शिकायत भी की है।

जाति- के आधार पर भेदभाव क्यों

समाज में जब सभी को जीने का बराबर हक है तो कर्नाटक के मैसूरी जिले के ननजाल कुड़ी तहसील के हलारे गांव में जाति के आधार पर भेदभाव क्यों। आखिर इस तरह के मामले कर्नाटक से क्यों आ रहे हैं। सेठी जो एक छोटा सा सैलून चलाते हैं, जब वह किसी भी ग्राहक बिना किसी भेदवार के सेवा दे रहे हैं, तो उन पर सामाजिक बहिष्कार क्यों। सवाल काफी अहम हो चला है कि जाति के आधार पर भेदभाव करने का खेल करने वाले लोगों पर प्रशासन कब एक्शन लेगा। या फिर सेठी जैसे लोगों को हर बार आत्महत्या करने की चेतावनी देनी पड़ेगी।

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