अभिभावकों की सीएम से मांग, जब तक ना आ जाए कोरोना की दवा, तब तक बंद रखे जाएं स्कूल

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हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने कहा है कि हरियाणा सरकार द्वारा 30 नवंबर तक स्कूल बंद कर देने के निर्णय से छात्र व अध्यापकों को सिर्फ फोरी तौर से ही राहत मिली है लेकिन जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं आ जाती तब तक कोराना का खतरा बना रहेगा, अतः ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखते हुए सभी सरकारी व प्राइवेट स्कूलों को 30 नवंबर के बाद भी बंद रखना चाहिए। मंच का कहना है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि जब तक कोरोना की कोई दवाई व वैक्सिन नहीं बन जाती है तब तक ढीलाई नहीं बरतनी चाहिए।

फिलहाल बच्चों को ना भेंजे स्कूल-

मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा व जिला अध्यक्ष एडवोकेट शिव कुमार जोशी ने उन अभिभावकों से जो अपने बच्चों को स्कूलों में भेजने के लिए लालायित हैं कहा है कि वे अपने बच्चों को किसी भी हालात में स्कूल ना भेजें। कोरोना से देश बचेगा, समाज बचेगा तो पढ़ाई भी अपने आप बच जाएगी। अभिभावक कोई रिस्क ना लें।

सरकार ने 30 नवंबर तक बंद किए हैं स्कूल-

बता दें कि राज्य सरकार ने बीते शुक्रवार को 30 नवंबर तक स्कूल बंद रखने की घोषणा की है। पिछले कुछ दिनों के भीतर ही स्कूलों में कोरोना के तमाम केस सामने आने लगे थे। टीचर के साथ साथ बच्चे भी कोरोना पॉजीटिव पाए जाने के बाद अभिभावकों ने फिलहाल स्कूलों को बंद करने की मांग की थी। वहीं स्कूलों में कोरोना के केस बढ़ते ही सरकार पर भी दबाव पडऩे लगा था। इसलिए देखते ही देखते शुक्रवार को सरकार ने सभी स्कूलों को बंद करने के आदेश जारी कर दिए।

जब तक कोरोना की दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं-

 हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि जब तक कोरोना की दवाई नहीं आ जाती, तब तक स्कूलों को बंद ही रखा जाना बेहतर होगा। मंच ने प्रधानमंत्री के उस संबोधन का भी हवाला दिया है, जिसमें कहा गया है कि जब तक कोरोना की दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं। मंच ने कहा है कि राज्य के मुख्यमंत्री को भी इस संबोधन के अनुसार तब तक बच्चों को स्कूल नहीं बुलाना चाहिए, जब तक कोरोना की प्रभावी दवा नहीं आ जाती।

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