दिल्ली चिडिय़ाघर में भोपाल से आए बिट्टू(बंगाल टाइगर) की मौत से दुख में पर्यटक

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Bengal tiger

कोराना काल के दौरान लगे लॉकडाउन में दिल्ली जू को बंद कर दिया था। हालांकि यहां पर तैनात सुरक्षाकर्मी व अन्य अधिकारी रोजाना अपनी सेवा देते रहे हैं। जू के अंदर मौजूद 1200 वन्यजीवों की देखरेख भी बहुत अच्छे से किया जा रहा है। लेकिन इन सबके बीच लगता है जू को किसी की नजर लग गई है, आए दिन यहां पर बड़े प्रजाति के वन्यजीव की किसी न किसी वजह से मौत हो जाती है। ताजा मामला एक बार फिर से दिल्ली जू से ही आया है, जिसमें बीते गुरूवार को एक 15 साल के बंगाल टाइगर की मौत हो गई है। मौत की वजह के पीछे क्रॉनिक किडनी डिसऑर्डर के लक्षण बताए गए हैं। हालांकि मौत के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं, इस कड़ी में इसकी अधिक जानकारी के लिए टाइगर का सैंपल बरेली स्थि भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान भेजा गया है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही खुलासा हो पाएगा कि आखिर टाइगर की मौत कैसे हुई थी। बता दे कि साल 2019 में किडनी फेल होने से रामा(बंगाल टाइगर) की मौत भी हुई थी।
क्या कहते हैं दिल्ली जू के निदेशक
दिल्ली जू के निदेशक रमेश पांडे के मुताबिक 15 साल के बंगाल टाइगर (बिट्ू) जिसकी तबियत बीते 20 दिनों से काफी खराब चल रही थी। डॉक्टरों की निगरानी में टाइगर का ध्यान रखा जा रहा था। टाइगर को विशेष ट्रीटमेंट भी दिया जा रहा था। लेकिन आखिरकार गुरुवार को उसने दम तोड़ दिया। जानकारी के मुताबिक टाइगर को वर्ष 2014 में भोपाल के वन विहार से दिल्ली जू लाया गया था। बताया जाता है कि यह टाइगर यहां आने वाले पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र था। बताते चले कि आमतौर पर टाइगर जंगल में 10 से 12 साल जीते हैं , वहीं कुछ बंगाल टाइगर 15 से 18 वर्ष भी आराम से जीते हैं।
कभी खुशी कभी कम
दिल्ली जू में कभी खुशी गम का माहौल चल रहा है। अभी बीते कुछ दिन पहले ही एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत कानपुर से ब्रीडिंग के लिए बरखा बाखिन को दिल्ली जू लाया गया था। वहीं गुरुवार को बिट्टू की हुई मौत से पूरा जू परिसर गमगीन है। जू के कर्मचारी व जू रैंजर भी काफी दुखी हैं। जू के क्यूरेटर रियाज खान कहते हैं कि बंगाल टाइगर यहां पर आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता था।

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