एशियन अस्पताल में कोरोना मरीज की मौत, पीडि़त परिवार को थमाया लाखों का बिल, हंगामा हुआ तो बुला लिए बाऊंसर

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Faridabad News ।  कोरोना के महाकाल ने जहां पूरे विश्व को हिलाकर रख दिया है, वहीं कई प्राईवेट अस्पतालों ने इस जानलेवा आपदा को धंधा बना लिया है। हर रोज दिल्ली से लेकर देश के तमाम बड़े निजी अस्पतालों द्वारा कोरोना मरीजों का आर्थिक शोषण करने की खबरें आ रही हैं। अस्पतालों में मरीजों के परिजनों से पीपीई किट के नाम पर ही हजारों रुपए ठगे जा रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों की मौत पर भी सौदेबाजी की जा रही हैं। कोरोना से मौत के बाद निजी अस्पताल मरीजों के परिजनों को लंबा चौड़ा बिल थमा देते हैं। इससे लाखों लोग खासे परेशान हैं। एक ओर वह कोरोना की बीमारी से लड़ रहे हैं तो दूसरी ओर उन्हें निजी अस्पतालों की मनमर्जी से भी जूझना पड़ता है।

ये है पूरा मामला-

ऐसा ही एक मामला सैक्टर 21 के एशियन अस्पताल में सामने आया है। दो दिन पहले इस अस्पताल में फरीदाबाद के एनआईटी नंबर पांच में रहने वाले 78 वर्षीय महेंद्र सिंह को कोरोना की बीमारी के चलते भर्ती करवाया गया था। उनके बेटे ने बताया कि उनके पिता शुगर के मरीज थे। उन्हें इस बीमारी के चलते इस अस्पताल में लाया गया था। अस्पताल में उन्होंने साफ तौर पर डाक्टरों को बता दिया था कि उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। वह अधिक बिल नहीं चुका पाएंगे। डाक्टरों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उनका प्रतिदिन 30 हजार रुपए का बिल बनेगा। इस आश्वासन पर उनके पिता को अस्पताल में भर्ती कर दिया गया। हालांकि उनके पिता का 3 लाख रुपए का मेडीक्लेम था, जिसमें से ढाई लाख रुपए तक का क्लेम मिलने की बात उन्होंने डाक्टरों को बता दी थी। उनके पिता को एडमिट करने के बाद उनसे एक लाख रुपए जमा करवाने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने असमर्थता जता दी। इसके बाद उन्होंने किसी तरह से 25 हजार रुपए जमा करवा दिए।

रविवार को हुई मौत तो थमा दिया लंबा चौड़ा बिल-

रविवार की सुबह दस बजे अस्पताल में उनके पिता की डेथ हो गई। उनके पिता की मौत के साथ ही अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें 3 लाख 80 हजार रुपए लंबा चौडा बिल थमा दिया। जबकि पहले उनसे कहा गया था कि डेढ से दो लाख रुपए से अधिक बिल नहीं बनने दिया जाएगा, लेकिन अब मेडीक्लेम से ढाई लाख रुपए लेने के बावजूद उन पर और अधिक बिल भरने के लिए दबाया जा रहा है। जब उन्होंने इस बात का विरोध किया तो अस्पताल प्रबंधन ने बाऊंसर बुला लिए। कोरोना से मौत के बावजूद अधिक बिल देने के विरोध में परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा दिया। विरोध को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने जब बाऊंसर बुला लिए तो पीडि़त परिजनों ने पुलिस को फोन कर दिया। पुलिस अस्पताल में पहुंची और प्रबंधन से बातचीत की। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन बिना बिल लिए शव ना देने पर अड़ गया।

बिल के बाद दिया गया शव

काफी घंटों की मशक्कत के बाद बिल में करीब 30 हजार रुपए की छूट देने के बाद परिजनों को शव दिया गया। इस मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया गया, मगर उन्होंने फोन का कोई जवाब नहीं दिया, जिसके चलते अस्पताल प्रबंधन से उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।

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