सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, केस के बाद भी महिला को सास ससुर के घर में रहने का हक

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नई दिल्ली। परिवारों में घरेलू हिंसा के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि घरेलू हिंसा के मामले में पत्नी का यदि अपने पति से विवाद हो जाए तो भी वह अपने ससुराल पक्ष में रह सकती है। यह उसका अधिकार है। ऐसे ही एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी व्याख्या दी है। दरअसल दिल्ली के एक पॉश कालोनी में रहने वाले पति-पत्नी के बीच कुछ वर्षों बाद ही विवाद शुरू हो गया। महिला ने घरेलू हिंसा के चलते अपने पति व सास ससुर के खिलाफ केस कर दिया। इस केस के बाद दोनों परिवारों में खिंचाव इस कदर बढ़ गया कि ससुर ने अपनी बहू से कहा कि वह उनके द्वारा खरीदा गया अपना निजी मकान है, जिसे खाली करना होगा। लेकिन बहू ने ना केवल मकान खाली करने से साफ मना कर दिया , बल्कि उस मकान में रहने को अपना अधिकार भी बताया।

घरेलू हिंसा एक्ट के अंतर्गत कोई महिला अपने सास ससुर सहित रिश्तेदारों के घर भी रहने की हकदार है। सुप्रीम कोर्ट ने वीरवार को घरेलू हिंसा के मामले में शेयर्ड हाऊस होल्ड की व्याख्या करते हुए उपरोक्त टिप्पणी की। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि शेयर्ड हाऊस होल्ड का मतलब पति के रिश्तेदारों से भी है। घरेलू हिंसा कानून के तहत महिला अपने पति के उन रिश्तेदारों के घर भी रह सकती है, जहां वह घरेलू संबंधों के कारण कुछ समय रही हो।

सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने वर्ष 2007 में कहा था कि पत्नी केवल पति द्वारा किराए पर लिए गए घर या फिर संयुक्त परिवार में ही रह सकती है। लेकिन इस व्याख्या में सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि देश में महिलाएं बड़े पैमाने पर घरेलू हिंसा का सामना कर रही हैं। महिलाओं को किसी ना किसी रूप में हिंसा का सामना करना पड़ता है। हालांकि समाज में शर्म के डर से अधिकांश मामले दर्ज ही नहीं हो पाते हैं। महिलाओं से उम्मीद की जाती है कि वह अपने पति के साथ साथ उनके रिश्तेदारों के अधीन भी रहे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी समाज के प्रगति में महिलाओं का विशेष योगदान होता है। इसलिए उनके अधिकारों की रक्षा करने का दायित्व भी समाज के कंधों पर होता है।

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