हरियाणा में बनाए गए 15 चेयरमैन, खाली रही फरीदाबाद की झोली, जानिए सभी के नाम

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चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने तुरन्त प्रभाव से विभिन्न बोर्डों व निगमों में 14 नए चेयरमैनों की एवं एक वाईस-चेयरमैन की नियुक्ति की है।  नव-नियुक्त चेयरमैनों में पूर्व विधायक  सुभाष बराला को हरियाणा सार्वजनिक उपक्रम ब्यूरो, होडल के विधायक  जगदीश नैय्यर को हरियाणा भूमि सुधार एवं विकास निगम, बादशाहपुर के विधायक  राकेश दौलताबाद को हरियाणा कृषि उद्योग निगम, बरवाला के विधायक   राम निवास को हरियाणा खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया है।
ये भी बनाए गए चेयरमैन-
इनके अतिरिक्त पूर्व ओलंम्पियन व चरखी दादरी जिला की सुश्री बबीता फोगाट को हरियाणा महिला विकास निगम, कैथल जिला के  कैलाश भगत को हैफेड, करनाल जिला की श्रीमती निर्मल बैरागी को हरियाणा पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम, यमुनानगर जिला के  राम निवास गर्ग को हरियाणा व्यापारी कल्याण बोर्ड, रेवाड़ी जिला के  अरविन्द यादव को हरको बैंक, भिवानी जिला के मुकेश गौड़ को हरियाणा युवा आयोग तथा सोनीपत जिला के  पवन खरखोदा को हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम एवं गुहला के  रणधीर सिंह पुत्र  ईश्वर सिंह को हरियाणा डेयरी विकास संघ का चेयरमैन नियुक्त किया गया है।  साथ ही कुरूक्षेत्र जिला के  धूमन सिंह किरमच को सरस्वती हैरिटेज बोर्ड का  वाईस-चेयरमैन नियुक्त किया है।

 

खाली रही फरीदाबाद की झोली-

उल्लेखनीय है कि चेयरमैनों की इस नियुक्ति में फरीदाबाद के हाथ पूरी तरह से खाली रहे हैं। इससे पहले फरीदाबाद जिले में 4 चेयरमैन थे। इनमें धनेश अदलक्खा, अजय गौड़, सुरेंद्र तेवतिया तथा शहीद भगतसिंह के पपौत्र यादवेंद्र सिंह के नाम प्रमुख हैं। इनमें से फिलहाल अजय गौड़ मुख्यमंत्री मनोहर लाल के राजनैतिक सचिव हैं तो धनेश अदलक्खा ऑल इंडिया फार्मेसी काँऊसिल के सदस्य हैं। अदलक्खा ने कहा कि वह आज भी हरियाणा फार्मेंसी काऊंसिल के चेयरमैन हैं।  निर्दलीय विधायक नयनपाल रावत को पहले ही सरकार को समर्थन देने की एवज में चेयरमैनी दी गई थी। रावत को निर्दलीय विधायक के कोटे में यह चेयरमैनी सरकार ने दी थी। बाकि सुरेंद्र तेवतिया व यादवेंद्र सिंह (युवा आयोग के चेयरमैन)को सरकार ने अभी तक किसी भी महकमे में एडजस्ट नहीं किया है। हालांकि फरीदाबाद के कई भाजपा नेताओं ने इस लिस्ट में स्थान पाने के लिए पूरी लॉबिंग की थी, मगर सरकार अपने नेताओं को चेयरमैन बनाने की बजाए विधायकों को सत्ता का स्वाद चखाना चाहती थी। ताकि उनके भीतर पनप रहे असंतोष को शांत किया जा सके। इनमें कई निर्दलीय विधायक भी शामिल किए गए हैं। लेकिन वहीं दूसरी ओर भाजपा के पुराने नेताओं में अब नाराजगी पनपने लगी है।

 

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