अब कोरोना मरीजों के घरों के बाहर नहीं लगेंगे चेतावनी नोटिस, सरकार ने जारी किए आदेश

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Chandigarh News (citymail news) राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने निर्णय लिया है कि अब कोरोना मरीजों के घरों के बाहर चेतावनी पोस्टर नहीं लगाए जाएंगे। विभाग ने इस संदर्भ में लिए गए निर्णय से मुख्य सचिव सहित जिले के सिविल सर्जन को भी अवगत करवा दिया है। लिखित तौर पर जारी आदेश में कहा गया है कि अब कोरोना मरीजों के घर के बाहर पोस्टर लगाने पर मनाही हो गई है। भविष्य में किसी भी कोरोना मरीज के घर के बाहर स्वास्थ्य विभाग इस तरह के पोस्टर नहीं लगाएगा। इस आदेश के बाद अब राज्य भर में किसी भी कोरोना मरीज के घर के बाहर ये पोस्टर नहीं लगाए जाएंगे। हालांकि सरकारी आदेश से पहले ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा अनेक इलाकों में इस तरह के पोस्टर लगाने बंद कर दिए थे। इसके बावजूद अब स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारिक रूप से यह जानकारी सिविल सर्जन को लिखित तौर पर जारी कर दी है।

इस तरह से लगाए जाते थे चेतावनी नोटिस-

बता दें कि कोरोना की शुरूआत होते ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना मरीजों के घरों के बाहर चेतावनी नोटिस लगाए जाते थे। ये नोटिस तब तक इन घरों के बाहर लगे रहते थे, जब तक कोरोना मरीज पूरी तरह से ठीक ना हो जाए। पोस्टर लगाने का उद्देश्य आसपास रहने वाले लोगों को जागरूक करना भी था। ताकि वह कोरोना मरीज व उनके परिवारों से दूरी बनाकर रखें और यह बीमारी अन्य लोगों में ना फैल सके।

पोस्टर लगाते ही हो जाती थी दहशत-

हालांकि इस तरह के पोस्टर लगाने से इलाके में दहशत का माहौल पैदा हो जाता था और एक तरह से कोरोना पीडि़त परिवार का बहिष्कार हो जाता था। जैसे ही स्वास्थ्य विभाग किसी कोरोना मरीज के घर पोस्टर लगाने आते थे तो पूरे इलाके में सनसनी व्याप्त हो जाती थी। लोगों में शोर मच जाता था कि फ्लां घर में कोरोना का मरीज है। डर के मारे लोग उस गली से भी नहीं गुजरते थे। मार्च महीने के बाद से अगस्त महीने तक इस तरह का डर लोगों में व्याप्त रहता था।

एंबुलेंस से मच जाती थी सनसनी-

इसी के साथ जब कोई एंबुलेंस किसी कोरोना मरीज को लेने आती तो पूरे इलाके में यह खबर पूरी तरह से फैल जाती थी। मरीजों को ले जाते हुए एंबुलेंस की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दी जाती थी। इसका मकसद लोगों को जागरूक करने के लिए किया जाता था। मगर कोरोना पीडि़त व उनके परिवार को इस तरह की हरकत काफी दुख देती थी। जिस घर के बाहर कोरोना मरीज होने का पोस्टर लग जाता था, वह परिवार पूरे इलाके की निगरानी में रहता था। इससे पीडि़त परिवार को काफी तकलीफ भी झेलनी पड़ती थी। लेकिन सरकार ने अब इस तरह के पोस्टर लगाने के आदेश को वापिस ले लिया है।

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