1-K / 193 की अवैध दुकानों पर आयुक्त ने मांगी रिपोर्ट , तोडफ़ोड़ के अधिकारी बचाने में जुटे ?

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नगर निगम कमिश्नर यश गर्ग ने 1-K / 193 की अवैध दुकानों के निर्माण को लेकर तोडफ़ोड़ विभाग के अधिकारियों से रिपोर्ट तलब कर ली है। लेकिन कुछ अधिकारी इस अवैध निर्माण को बचाने की जुगत में लग गए हैं। प्लाट नंबर 1-K / 193 पर अवैध रूप से मार्केट बनाई जा रही है। हालांकि कुछ दिन पहले ही आयुक्त यश गर्ग के आदेश पर इन दुकानों को तोड़ा गया था, मगर मिलीभगत के चलते फिर से उनका निर्माण शुरू करवा दिया गया।

खबर प्रकाशित हुई तो आयुक्त को भी पता चला-

हाल ही में सिटीमेल ने इस अवैध मार्केट व कमिश्नर के आदेशों को अनदेखा करने को लेकर पूरी खबर प्रकाशित की थी। इस खबर के बाद आयुक्त यश गर्ग ने तो तोडफ़ोड़ विभाग के अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की ही है, साथ ही ज्वाइंट कमिश्नर प्रशांत कुमार ने भी इस अवैध निर्माण की पूरी कुंडली मांग ली है। बता दें कि 1-K / 193 नामक प्लाट पर अवैध रूप से मार्केट बनाई जा रही है। इस मार्के ट की दुकानों को अच्छे रेटों पर बेच भी दिया गया है। इन अवैध दुकानों को बनवाने में तोडफ़ोड़ विभाग के अधिकारियों की भूमिका सामने आ रही है।

अवैध निर्माणों का गढ़ बना बडख़ल-

यहां बता दें कि बडख़ल विधानसभा क्षेत्र अवैध निर्माणों का गढ़ बना हुआ है। अवैध निर्माणों के बदले कथित उगाही का मोटा व्यापार भी चल रहा है। इस महकमे में रहने के लिए अधिकारी ऊपरी सिफारिश भी लगवाते हैं। इसका कारण साफ है कि इस इलाके में अवैध निर्माण बनवाने की एवज में अधिकारियों को कथित तौर पर मुंहमांगी कीमत मिलती है। हाल ही में आयुक्त ने इस महकमे में फेरबदल करते हुए एसडीओ की पोस्ट से पदम भूषण को हटाकर हकमूददीन खान को नियुक्त किया था। आयुक्त को उम्मीद थी कि वह अवैध निर्माणों को रोकने के लिए कारगर कदम उठाएंगे। मगर उनकी नियुक्ति के बाद भी अवैध निर्माणों पर रोक ना लगना बहुत कुछ संकेत दे रहे हैं। बताया गया है कि एसडीओ भी अवैध निर्माणों को रूकवाने की बजाए गंगा में हाथ धो रहे हैं। यही वजह है कि रविवार को दिन दहाड़े 1-K / 193  की अवैध दुकानों के लैंटर डाल दिए गए और इन अधिकारियों को पता होने के बावजूद वह आंखें बंद करके बैठ थे। यह हाल तो तब है, जब आयुक्त यश गर्ग के आदेश पर इन दुकानों को तोड़ा गया था। इसका भी कारण साफ है कि तोडफ़ोड़ विभाग के कुछ अधिकारी अवैध निर्माणों से कथित तौर पर उगाही के सामने आयुक्त के आदेशों को भी ठेंगे पर रखते हैं। देखना अब यह है कि इस अवैध मार्र्केट की दुकानों को लेकर निगम आयुक्त व ज्वाइंट कमिश्नर द्वारा क्या कार्रवाई की जाती है।

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