थैलीसीमिया पीड़ितों को नहीं देना पड़ेगा टेस्टिंग का खर्चा, दिल्ली और जर्मनी में हुआ करार

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राजीव गांधी कैंसर संस्थान और रिसर्च सेंटर, नई दिल्ली (आर.जी.सी.आर.सी), डी.के.एम.एस – बी.एम.एस.टी. और ग्लोबली इंटीग्रेटिड फॉउंडेशन फॉर थैलेसीमिया (गिफ़्ट) के बीच हुए एक समझौते के तहत आर.जी.सी.आर.सी. वंचित थैलेसीमिया मरीजों और उनके भाई-बहनों की बिलकुल निशुल्क ‘एच.एल.ए टाइपिंग’ करेगा।
क्या होता है एच.एल.ए.?
एच.एल.ए (ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजेन) टाइपिंग बोन मैरो (यानी, हैमेटोपिटिक स्टेम सेल) ट्रांसप्लांटेशन के लिए सबसे पहला और सबसे ज़रूरी कदम है। एच.एल.ए., हिस्टोकॉम्पैटिबिलिटी कॉम्प्लेक्स – एक जीन समूह जो कई प्रजातियों में होता है, का प्रमुख मानव संस्करण है। एम.एच.सी. कॉम्प्लेक्स में क्रोमोसोम 6 के साथ करीब 200 से अधिक जीन होते हैं। मरीज़ और दाता का एच.एल.ए का मिलान स्टैम सैल प्रत्यारोपण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आम तौर पर एक एच.एल.ए टाइपिंग के लिए शुल्क लगभग रु 12,000/- होता है। इस टाई-अप के माध्यम से रोगियों, उनके भाई-बहनों और यहाँ तक ​​कि असंबंधित संभावित दाताओं के एच.एल.ए टाइपिंग की लागत शून्य होगी।
एच.एल.ए का मिलान कैसे होगा ?
विश्लेषण के लिए बक्कल स्वाब (मुँह में गॉल के अंदर की तरफ से लार) के नमूने डी.के.एम.एस. लाइफ साइंसेज लैब, ड्रेसडेन – जर्मनी भेजे जाएंगे। किसी मरीज या दाता का एच.एल.ए मैच मिलान होने के बाद, रोगी की स्टैम सैल ट्रांसप्लांटेशन सम्बंधित काउंसलिंग राजीव गाँधी कैंसर इंस्टीट्यूट व रिसर्च सैंटर के हेमटोलॉजी ऑन्कोलॉजी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ दिनेश भूरानी जी करेंगे। डॉ भूरानी, एक ऐसा नाम जिसे इस विषय में किसी परिचय की कोई आवश्यकता नहीं है। इस करार का सबसे अच्छा हिस्सा यह है कि डॉ से परामर्श के बाद रोगी अपनी पसंद के किसी भी अस्पताल में प्रत्यारोपण करने के लिए स्वतंत्र होंगे। गिफ़्ट के संस्थापक व अध्यक्ष मदन चावला के अनुसार गिफ़्ट, राजीव गांधी कैंसर संस्थान और रिसर्च सेंटर व डी.के.एम.एस – बी.एम.एस.टी के बीच के समझौते के तहत रोगी किसी भी तरह से बाध्य नहीं होंगें। यह विशुद्ध रूप से एक निस्वार्थ सेवा है,
ज्ञात हो, कि गिफ़्ट का पहले भी भारतवर्ष के सबसे बड़ी स्टैम सैल रजिस्ट्री दात्री और हिस्टोजैनेटिक्स लैब, न्यूयॉर्क, अमेरिका के साथ एच.एल.ए टाइपिंग के लिए एक त्रिकोणीय समझौता है। हालाँकि, इस समझौते के तहत एच.एल.ए टाइपिंग की लागत को हिस्टोजैनेटिक्स/दात्री द्वारा लगभग 85% तक डिस्काउंटिड किया गया है, जबकि वंचित मरीज़ो के लिये शेष 15% लागत का का वहन गिफ़्ट द्वारा किया जाता है।
कैसे होता है स्टैम सैल ट्राँसप्लांट (प्रत्यारोपण)?
रक्त्त स्टेम कोशिकाएं विशेष कोशिकाएं हैं जो किसी के शरीर में लाल रक्त्त कोशिकाओं, सफेद रक्त्त कोशिकाओं, प्लेटलेट्स आदि का उत्पादन करती हैं। रक्त्त स्टैम सैल प्रत्यारोपण विभिन्न प्रकार के होते हैं। प्रत्यारोपण का प्रकार रक्त्त स्टैम कोशिकाओं के स्रोत के अनुसार होता है।  परिधीय स्टैम सैल प्रत्यारोपण (पी.बी.एस.सी?टी) रक्त्त प्रवाह से एकत्रित रक्त्त प्रवाह कोशिकाओं का उपयोग करता है। यह 90% से अधिक प्रत्यारोपण में उपयोग की जाने वाली सबसे आम विधि है। इस प्रक्रिया के माध्यम से स्टैम सैल दान करना लगभग प्लेटलेट्स दान करने जैसा आसान है।  प्रत्यारोपण की अन्य दो विधियाँ अस्थि मज्जा (बोन मैरो) या नवजात शिशु के गर्भनाल से एकत्रित स्टैम सैल से होती हैं।
घर बैठे दीजिये सैम्पल
गिफ़्ट, राजीव गांधी कैंसर संस्थान और रिसर्च सेंटर व डी.के.एम.एस – बी.एम.एस.टी के बीच समझौते का एक और अच्छा पहलू यह है कि गाल स्वाब किट दाताओं के पते पर प्रीपेड लिफाफे के साथ भेजे जायेंगीं। दाता को बस अपना स्वैब लेना होगा। गाल का स्वाब लेना एक आसान, 15 सेकंड से कम की प्रक्रिया है, जिसे किट के साथ भेजे गए बहुभाषी पत्रक के माध्यम से अच्छी तरह से समझाया जाता है। इसमें किसी प्रकार की कोई चुभन या दर्द नहीं होता। यह वास्तव में अपने मसूड़ों पर उंगली से मंजन करने से भी ज़्यादा आसान है। गाल स्वाब लेने के बाद, आपको उसे दिये गये प्रीपेड लिफाफे के माध्यम से उच्च रिज़ॉल्यूशन एच.एल.ए. टाइपिंग के लिए भेज देना होगा। एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य के लिये बनाई गई यह निशुल्क व आसान व्यवस्था सभी के लिए जीत-जीत की प्रतीक है, मदन चावला ने कहा।
कृप्या ध्यान दें-
इस लेख में चिकित्सा विज्ञान संबंधी कुछ तकनीकी शब्दों का उपयोग किया गया, जिस के कारण आपको शायद यह प्रतीत हो कि यह एक मुश्किल प्रक्रिया है। निसंदेह यह एक अति जटिल प्रकिया है, परन्तु आप बिल्कुल निश्चिंत रहें, उस काम के लिये शिक्षित, अनुभवी व विशेषज्ञ डॉक्टर्स हैं।  एक डोनर के रूप में आपका रोल बहुत ही आसान है। साधारण शब्दों में बस इतना समझ लीजिये, कि आप अपनी समझदारी व सहयोग किसी बच्चे को नया जीवन दे सकते हैं। इस संदर्भ में अधिक जानकारी व सहायता के लिये गिफ़्ट के अध्यक्ष, मदन चावला से +91 9811089975 पर निसकोंच सम्पर्क करें। श्री चावला ने बताया कि बच्चों के ईलाज को लेकर उनकी संस्था का दिल्ली और जर्मनी के डाक्टरों के साथ भी समझौता हुआ है। इसका इस गंभीर बीमारी से पीडि़त बच्चों को लाभ मिलेगा।

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