हाईकोर्ट ने प्राईवेट स्कूलों को दिया झटका, अभिभावकों को मिली फीस पर बड़ी राहत

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Chandigarh News (citymail news) प्राइवेट स्कूलों द्वारा बच्चों से मासिक फीस, वार्षिक  शुल्क और ट्रांसपोर्ट फीस वसूलने के मामले पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकाेर्ट की डबल बेंच द्वारा अभिभावकों के हित में दिए गए फैसले पर हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने सत्यमेव जयते कहकर स्वागत किया है। मंच ने पेरेंट्स से कहा है कि वे पहले से ज्यादा जागरूक व एकजुट होकर प्राइवेट स्कूलों की प्रत्येक मनमानी का बिना किसी डर के खुलकर विरोध जारी रखें और मंच का साथ दें।
फीस वापस कराए जाए या एडजस्ट कराया जाए-
मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने चेयरमैन एफएफआरसी कम मंडलायुक्त फरीदाबाद संजय जून को पत्र लिखकर मांग की है कि जिन प्राइवेट स्कूल संचालकों ने अभिभावकों से बढ़ी हुई ट्यूशन फीस, ट्रांसपोर्ट, एनुअल चार्ज व अन्य फंडों में फीस वसूल ली है उसे वापस कराए जाए या आगे के महीनों की फीस में एडजस्ट कराया जाए। इसके अलावा जिन स्कूलों ने ऑनलाइन क्लास दी ही नहीं है और उन्होंने अपने पेरेंट्स से फीस वसूल ली है उनसे भी पेरेंट्स को फीस वापस कराई जाए। मंच के पुनः निर्वाचित किए गए जिला अध्यक्ष एडवोकेट शिव कुमार जोशी व सचिव डॉ मनोज शर्मा ने कहा है कि मंच की नवगठित कार्यकारिणी व सभी पेरेंट्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों की रविवार 11 अक्टूबर को एक मीटिंग बुलाई गई है। जिसमें हाईकोर्ट के फैसले की समीक्षा और दिए गए फैसले को ईमानदारी से लागू करवाने के बारे में विचार विमर्श किया जाएगा
छात्रों से सिर्फ टयूशन फीस वसूल सकते हैं-
गौरतलब है कि हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एक अक्टूबर को ये फीसें वसूलने के एकल बेंच के फैसले के खिलाफ हरियाणा सरकार व अभिभावकोंं ‍ द्वारा दायर की गई अपील पर हाईकोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि जिन स्कूलों ने लॉकडाउन के दौरान ऑन-लाइन क्लास की सुविधा दी है सिर्फ वही स्कूल छात्रों से सिर्फ टयूशन फीस वसूल सकते हैं, इसके साथ ही हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों से पिछले सात महीनों की बैलेंस शीट वो भी किसी चार्टेड अकाउंटेंट से वेरिफाई करवाकर दो सप्ताह में सौंपे जाने के निजी स्कूलों को आदेश दे दिए हैं।
अभिभावकों के हित में उपरोक्त फैसले दिए-
जस्टिस राजीव शर्मा एवं जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू की खंडपीठ ने  हाईकोर्ट की एकल बेंच द्वारा 30 जून को दिए गए फैसले में मॉडिफाई करते हुए अभिभावकों के हित में उपरोक्त फैसले दिए हैं।  हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को यह भी आदेश दिए हैं कि वह अपने स्टाफ को चाहे रेगुलर हैं या कॉन्ट्रेक्ट पर या ऐड-हॉक पर उन्हें पूरा वेतन दिया जाएगा, जो 23 मार्च को लॉक-डाउन लगाए जाने के दिन से पहले स्‍कूल में नियुक्‍त थे। हाईकोर्ट ने यह भी साफ़ कर दिया है कि लॉकडाउन के दौरान छात्र स्‍कूल नहीं गए हैं ऐसे में निजी स्कूल छात्रों से कोई भी ट्रांपोर्टेशन फीस नहीं वसूल सकते हैं। इनकी आदेशों के साथ हाईकोर्ट ने इन सभी अपीलों पर अंतिम सुनवाई किए जाने के लिए इन्हे 12 नवंबर तक स्थगित कर दिया है।
जो सुविधा नहीं दी  उसकी फीस कैसे वसूल सकते हैं-
जस्टिस राजीव शर्मा ने कहा लॉक डाउन के दौरान स्कूलों ने जो सुविधा नहीं दी है उसकी फीस वह कैसे वसूल सकते हैं। हाई कोर्ट ने साफ़ किया है कि यह आदेश दायर इन अपीलों पर हाई कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर होंगी। यह आदेश पंजाब और हरियाणा के सभी निजी स्कूलों पर लागू होंगे।  इससे पहले इन अपीलों पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने कहा था कि अगर कोई छात्र फीस नहीं जमा करवा पाता है तो स्कूल छात्र का नाम नहीं काटेंगे। इस मामले में  हरियाणा सरकार द्वारा दायर  अपील में एकल बेंच के आदेश को रद करने की मांग की गई थी। सरकार ने अपील में कहा कि एकल बेंच ने सरकार के पक्ष को अनदेखा कर अपना फैसला दिया है। एकल बेंच का फैसला  वास्तविक स्थिति के विपरीत है।

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