चीन की हवा खराब, विश्व की सबसे बड़ी अटल सुरंग देश को समर्पित, 3200 करोड़ से हुई तैयार

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मनाली-लेह-लद्दाख को आपसे में जोडऩे वाली पिछले दस साल से बनाई जा रही विश्व की सबसे बड़ी अटल टनल को आज विधिवत रूप से देश को समर्पित कर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अटल टनल का शुभारंभ कर चीन को कड़ा संदेश दिया है। इस अवसर पर केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह एवं हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर विशेष तौर पर मौजूद थे।

ये हैं अटल टनल की विशेषताएं-

बता दें कि इस टनल के निर्माण पर करीब 3200 करोड़ रुपए की लागत आई है। हिमाचल प्रदेश के मनाली, लेह व लद्दाख को आपस में मिलाने वाली नौ किलोमीटर लंबी इस सुरंग को सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सुरंग का निर्माण बीआरओ द्वारा किया गया है। बताया गया है कि दस हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित इस सुरंग को बनाने के लिए 12 महीने 24 घंटे काम किया गया है। इसके लिए पहाडिय़ों को काटने में ही बीआरओ के जवानों का कड़ी मशक्कत करनी पड़ी है। लेकिन इस टनल के निर्माण को चीन व भारत के बीच चल रहे तनात के बीच खासा महत्व दिया जा रहा है। टनल के भीतर लोगों की सुरक्षा के मददेनजर तमाम इंतजाम किए गए हैं।

टनल का उद्घाटन करने पहुंचे पीएम-

इस अति आधुनिक टनल को देखने व उसका शुभारंभ करने प्रधानमंत्री अपनी टीम के साथ खुद पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने चीन को एक बार फिर से चेतावनी दी। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि ये भारत पुराना भारत नहीं है। आज के इस भारत में जहां सहनशीलता हैै, वहीं ये आधुनिक भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के प्रति भी सक्षम है।

स्व: वाजपेयी के नाम पर है यह टनल-

बता दें कि इस टनल को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर बनाया गया है। इस टनल की खूबियों को लेकर प्रधानमंत्री भी मोहित हुए बिना नहीं रह सके। इस टनल की विशेषता यह है कि इसके निर्माण को पूरी तरह से ना केवल आधुनिक रंग रूप दिया गया है, बल्कि उसकी सभी बारीकियों पर भी नजर रखी गई है। माना जा रहा है कि इस अटल टनल के निर्माण के बाद चीन को यह संदेश भी गया है कि वह आज के भारत को किसी भी तरह से कमजोर आंकने की गलती ना करे।

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