सीएम दफ्तर की आंखों में धूल झोंक रहे हैं MCF अधिकारी, नोट छापने की मशीन बने अवैध निर्माण

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Faridabad News (citymail news) अवैध निर्माणों को लेकर नगर निगम प्रशासन लगातार सीएम कार्यालय की आंखों में धूल झोंक रहा है। सीएम विंडो की शिकायतों को लेकर निगम अधिकारी ना केवल जिला प्रशासन बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय को भी गुमराह करने से बाज नहीं आ रहा। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है एनआईटी नंबर-5 बिजली निगम के दफ्तर के सामने स्थित वो अवैध निर्माण, जिसे हाल ही में सील किया गया था। सीएम विंडो पर शिकायत के बाद प्लाट नंबर 5 डी/ 110 पर बनी ईमारत को सील किया था। सील के बाद सीएम विंडो की शिकायत को बंद करते हुए सीएम कार्यालय को जवाब भेजा गया कि इस ईमारत को सील कर दिया गया है। निगम अधिकारियों की रिपोर्ट पर सीएम कार्यालय ने भी इसी रिपोर्ट को अपलोड कर दिया। जैसे ही यह रिपोर्ट अपलोड हुई तो रातों रात इस बिल्डिंग की सील को खोल दिया गया।

निगरानी कमेटी के सदस्य भाटिया ने जताई नाराजगी-

सीएम विंडो की निगरानी कमेटी के सदस्य आनंद कांत भाटिया ने इस ईमारत की सील खोलने पर निगम अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने साफ कहा कि तोडफ़ोड़ विभाग के अधिकारी सीएम विंडो को मजाक समझते हैं। सीएम दफ्तर की आंखों में मिर्च झोंकी जा रही है। उन्होंने कहा कि ज्वाइंट कमिश्नर सीएम विंडो के नोडल अधिकारी हैं और तोडफ़ोड़ विभाग भी उनके अधीन आता है। ऐसे में आसानी से कहा जा सकता है कि अधिकारी जानबूझ कर सीएम विंडो को फेल करना चाहते हैं। अधिकारी भाजपा सरकार को बदनाम करने के लिए जानबूझकर ऐसी कार्रवाई करते हैं, ताकि जनता के बीच सरकार का माखौल उड़े। श्री भाटिया ने कहा कि सीएम विंडो पर अवैध निर्माण, अतिक्रमण व सरकारी जमीन पर कब्जों को लेकर करीब 70 से 80 शिकायतें पैडिंग पड़ी हैं, जिन्हें जानबूझकर नहीं निपटाया जा रहा। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माणों को लेकर तोडफ़ोड़ विभाग के अधिकारी इसे नोट कमाने की टकसाल बनाए हुए हैं। यही वजह है कि जितने भी निर्माण तोड़े गए और सील किए, वो सभी आज धड़ल्ले से बनाए जा रहे हैं। सीलिंग खोल दी गई हैं और अवैध निर्माण फिर से बनाए जा रहे हैं।

5-जी/ 53 पहले तोड़ा गया अब फिर बनना शुरू- भाटिया

 

5-जी/ 53 नामक यह अवैध निर्माण भी भारी पुलिस बल के साथ निगम अधिकारियों द्वारा तोड़ा गया था, मगर आज वह फिर से बनाया जाने लगा है। श्री भाटिया ने कहा कि सीधे तौर पर इससे निगम अधिकारियों की नियत का पता चलता है। तोडफ़ोड़ विभाग में एसडीओ, बिल्डिंग इंस्पेक्टर सहित पूरा अमला है। लेकिन ये सभी अवैध निर्माण रूकवाने की बजाए उन्हें बनवाने की नौकरी कर रहे हैं। इसी प्रकार से 1-के ब्लाक/ 193 पहले तोड़ा गया, अब फिर से बनवाया जा रहा है। 1-डी/ 2 बीपी, 1-सी/ 192 , केसी सिनेमा के सामने बर्फखाना में बने अवैध निर्माण को भी सील किया गया था, अब उसकी सील खोल दी गई है। इसका मतलब साफ है कि सीलिंग व तोडफ़ोड़ के लिए मांगी जाने वाली भारी भरकम पुलिस फोर्स और डयूटी मजिस्टे्रट की उपलब्धता का निगम अधिकारी बेजा इस्तेमाल करते हैं। पहले तोडफ़ोड़ व सीलिंग के लिए भारी खर्च पर पुलिस फोर्स ली जाती है और फिर चुपके से सीलिंग खोल दी जाती है और अवैध निर्माण पुन: आरंभ हो जाते हैं।

 


कमिश्नर पर भी सवालिया निशान-

 

श्री भाटिया ने निगम आयुक्त यश गर्ग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाए हैं। श्री गर्ग को एक ईमानदार अधिकारी माना जाता है, मगर फिर भी वह तोडफ़ोड़ विभाग को लेकर आंखें बंद किए रहते हैं। इसका कारण तो वह खुद ही जानें, मगर जनता जो समझ सकती है, वह समझ लेती है। श्री भाटिया ने कहा कि उन्होंने निगम आयुक्त, ज्वाइंट कमिश्नर व एसडीओ तोडफ़ोड़ विभाग की कार्यप्रणाली से मुख्यमंत्री और स्थानीय निकाय मंत्री को अवगत करवा दिया है। उनसे कहा गया है कि निगम प्रशासन द्वारा भाजपा सरकार की छवि को धूमिल किया जा रहा है। इसलिए निगम प्रशासन के आरोपी अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

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