दिन दहाड़े सीलिंग और रातों रात सील गायब, नोट छापने की मशीन बने अवैध निर्माण

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Faridabad News (citymail news ) नगर निगम ने एनआईटी नंबर-5 में स्थित एक अवैध निर्माण को दिन दहाड़े सील किया था, मगर रातों रात उसकी सीलिंग खोल दी गई। विभाग के अधिकारी कहते हैं कि उनके साहब की मर्जी पर ही सीलिंग खुली है। इससे पहले साहब के आदेश पर एनआईटी नंबर 5 में बिजली निगम के दफ्तर के ठीक सामने ये अवैध निर्माण सील किया गया था। आखिर नगर निगम में ये चल क्या रहा है, हर किसी को इसकी पूरी भनक है, मगर कोई पूरी तरह से जुबान नहीं खोल पा रहा है।

पहले सीलिंग और फिर खोलने के आदेश-

पहले भारी पुलिस बल और नगर निगम के दर्जनों कर्मचारी व अधिकारियों की मौजूदगी में अवैध निर्माण को तोडऩे व सील करने का अभियान चलाया जाता है और फिर धीरे धीरे ये सभी अवैध निर्माण अचानक से लीगल होकर बनने शुरू हो जाते हैं। हैरत की बात है कि भारी खर्चे पर पुलिस के साथ इस तरह के अभियान चलाए जाते हैं और उसके बाद जेंबे भरने का धंधा शुरू हो जाता है। पहले अधिकारी अवैध निर्माणों को सील करते हैं और फिर रातों रात उनकी सील खोलने के आदेश जारी हो जाते हैं।

नोट छापने की मशीन बनें अवैध निर्माण-

आखिर लोगों के साथ ऐसी अनीति क्यों और किसके कहने पर की जा रही है। तोडफ़ोड़ विभाग के अधिकारी दबी जुबान से इसके लिए अपने एक बड़े अधिकारी की ओर इशारा करते हैं। कर्मचारियों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि इस साहब ने अवैध निर्माणों को नोट छापने की मशीन बना लिया है। ये अधिकारी पहले अवैध निर्माण सील करवाता है और फिर रातों रात चुपके से उनकी सील खुलवा देता है। निगम आयुक्त को भी इस पूरे खेल की पूरी जानकारी है, मगर ना जानें वह क्यों चुप्पी साधे हुए हैं। उनकी चुप्पी के चलते जहां फरीदाबाद के लोगों को जमकर लुटा जा रहा है।

बदनाम हो रही है मनोहर सरकार-

दूसरी ओर प्रदेश की मनोहर सरकार भी बदनामी की कठघरे में खड़ी है। लोग इस सरकार को जमकर कोस रहे हैं। लोगों का कहना है कि मनोहर सरकार में अधिकारी बेलगाम हैं, जिसकी वजह से आम आदमी का शोषण हो रहा है। ऐसा ही एक निर्माण 5 जी/ 53 है, जिसे पहले तोड़ा गया और अब उसे बनाने दिया जा रहा है। इस अवैध निर्माण को तोडऩे व बनवाने में भी इसी अधिकारी का नाम सामने आ रहा है। बताया गया है कि इस अवैध निर्माण को बनाने में करीब 15 लाख रुपए की डील हुई है। यह डील किसने की और किसे सूटकेस पहुंचाया गया, यह जांच का विषय है। लेकिन 5 जी/ 53 केे इस निर्माण को तोडऩे के बाद फिर से बनने देने को लेकर दाल पूरी तरह से काली नजर आ रही है।

कमिश्नर ने आंखों पर बांधी पट्टी-

इसी प्रकार से एनआईटी नंबर-5 में केसी सिनेमा के सामने भी कई अवैध निर्माण बने हैं। इनमें से एक बर्फ फैक्ट्री के अवैध निर्माण को भी सील किया गया था, लेकिन वह सील भी अब गायब हो गई है। हैरत की बात है कि अपनी नाक तले चल रहे इस खेल को जानते हुए भी निगम आयुक्त यश गर्ग आंखें बंद किए बैठे हैं। इसके अलावा भी कई और भी निर्माण ऐसे हैं, जिनकी सील खोल दी गई है।

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