कोरोना टेस्टिंग से अपना खाली खजाना भरेगी मनोहर सरकार, टेस्ट करवाने पर अब देनी होगी फीस

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Chandigarh News (citymail news) हरियाणा में बेशक कोरोना की रफ्तार तेज गति से बढ़ रही है, लेकिन सरकार को इससे कोई सरोकार नहीं है। सरकार ने कोरोना को भी अपना धंधा बनाते हुए उसे कमाई का एक बढिय़ा जरिया बना लिया है। इसके चलते ही सरकार ने हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में कोरोना टेस्ट पर शुल्क लगा दिया है। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार इस बीमारी को लेकर कितनी संवेदनशील है। सरकार ने आरटी पीसीआर टेस्ट पर 1600 रुपए, रेपिड एंटीजन टेस्ट पर 650 और आईएंडजी टेस्ट पर 250 रुपए का शुल्क निर्धारित कर दिया है। इसे लेकर मनोहर सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है।

यह तो अनीति है- अनीशपाल

विपक्षी दलों ने कहा है कि यह तो लोगों के साथ अनीति है। एक ओर पूरा प्रदेश कोरोना की मार झेल रहा है तो दूसरी ओर सरकार लोगों से कोरोना जांच करवाने के के नाम पर वसूली करने पर उतर आई है। लेकिन कोरोना टेस्ट करवाने पर शुल्क लगाकर सरकार लोगों को मारने पर भी तुली हुई है। विपक्षी दल कांग्रेस के नेता अनीश पाल ने सरकार से मांग की है कि कोरोना टेस्ट की फीस को हटा दिया जाए। कोरोना व लॉकडाऊन के चलते लोग आर्थिक रूप से टूट चुके हैं। बेरोजगारी व सभी व्यवसाय ठप्प पड़े हैं। ऐसे में लोगों से कोरोना टेस्ट की फीस लेना सरासर अन्याय है। बता दें कि हरियाणा में कोरोना के पॉजीटिव मरीजों की संख्या 1 लाख 20 हजार पर पहुंच चुकी है तथा अब तक इस बीमारी से 1240 लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसके बावजूद सरकार कोरोना टेस्ट पर फीस वसूल कर अपना खजाना भरने की जुगत में लग गई है।

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