पानी से भी सस्ता हुआ कच्चा तेल, मगर भारत में आसमान पर हैं पेट्रोल व डीजल के भाव

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New Delhi News (citymail news) दुनिया भर में कोरोना के चलते कच्चा तेल पानी से भी सस्ता हो गया है। जहां पानी की कीमत 20 रुपए प्रति एक लीटर है तो एक लीटर कच्चे तेल की कीमत 18.15 रुपए के करीब आ गई है। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल व डीजल के रेट काफी ऊंचाई पर हैं। सोमवार को कू्रड ऑयल 4 प्रतिशत गिरकर 39.19 डालर प्रति बैरल पर आ गया है। दुनियाभर में आर्थिक गतिविधियों को देखते हुए कू्रड तेल की कीमतों पर जोरदार तरीके से गिरावट आई है। हालांकि कच्चे तेल का उत्पादन और एक्सपोर्ट करने वाले देशों से लगातार कू्रड की सप्लाई बढ़ाए जाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

कच्चे तेल की कीमत-

बता दें कि एक बैरल में 159 लीटर होते हैं। वर्तमान में एक लीटर कच्चे तेल की कीमत 39 डॉलर बैरल पर चल रही है। एक डॉलर की कीमत इस समय 74 रुपए है और इस हिसाब से एक बैरल के दाम 2886 रुपए होते हैं। इसे यदि एक लीटर में बदला जाए तो इसकी कीमत 18.15 रुपए निकलकर आती है। इस तरह से तेल की कीमत पानी से भी कम हो रही है।

कोरोना के चलते तेल बाजार-

कोरोना वायरस के चलते दुनिया भर में लॉकडाऊन का ऐलान किया गया था। जिसकी वजह से पूरे विश्व में तमाम कारोबार ठप्प हो गए। इसका नतीजा यह निकला कि पेट्रोल व डीजल की मांग और खपत जमीन में चली गई। हालांकि इस बीच सऊदी अरब, अमेरिका व रूस के बीच कू्रड ऑयल के उत्पादन को घटाने के लिए कई दौर की वार्ता भी हुई, मगर यह वार्ता फेल हो गई। जिसके चलते उत्पादन कम नहीं हुआ और तेल के भाव जमीन सूंघते दिखाई दिए।

तेल पर निर्भर है सऊदी अरब-

इस बीच सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई। सऊदी अरब की पूरी व्यवस्था ही तेल की बिक्री पर निर्भर है। अर्थव्यवस्था डाऊन होते ही सऊदी ने कू्रड के दाम हद से भी ज्यादा गिरा दिए। जिसके बाद कू्रड ऑयल के दाम 16 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे चले गए। जिसके बाद अमेरिका का कू्रड ऑयल जीरो से भी नीचे चला गया। इसका सीधा सा लाभ भारत सहित उन देशों को मिला, जोकि सऊदी अरब व अमेरिका से तेल खरीदते हैं। यह देखते हुए मई-जून में उत्पादन कम किया गया जिसके बाद कू्रड की कीमतों में सुधार हुआ। इसके बाद इसकी कीमत 30 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि जून में इसके रेट 40 डॉलर प्रति बैरल को पार गए।

भारत सरकार ने उठाया पूरा लाभ-

भारत सरकार ने इसका पूरा लाभ उठाया और कच्चा तेल कम कीमतों पर खरीदा। मगर इसके अनुपात में भारत सरकार ने अपने देश में तेल की कीमतों को कम नहीं किया। इसका सीधा सा लाभ भारत सरकार के घाटे में जाते खजाने को मिला और इसे कम करने में मदद मिली। इसका लाभ यह हुआ कि डॉलर के मुकाबले रुपए की सुस्ती कुछ कम हुई और यह 77 के मुकाबले सुधरकर 74 पर आ गया। लेकिन वहीं दूसरी ओर भारत के लोगों को क्रूड ऑयल में गिरावट का लाभ नहीं मिला और अब भी लोगों को मंहगे दामों पर ही डीजल व पेट्रोल खरीदना पड़ रहा है।

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