बल्लभगढ़ के बड़े घोटाले को दबाने के लिए हुआ फाईनेंस कंट्रोलर का निलंबन, अब मामला शांत

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Faridabad News (citymail news ) लगता है कि फरीदाबाद नगर निगम के फाईनेंस कंट्रोलर विशाल कौशिक के निलंबन के बाद करोड़ों रुपए के घोटाले का पूरा प्रकरण दबा दिया गया है। माना जा रहा है कि विशाल कौशिक को इसलिए बलि का बकरा बनाया गया, ताकि करोड़ों रुपयों के घपलों को दबाया जा सके। हाल ही में बल्लभगढ़ में बड़े पैमाने पर होने वाले करोड़ों रुपए के घोटाले का मामला सामने आया था। सरकार के लिए यह घोटाला मुसीबत बन गया था। कांग्रेस ने भी इस घोटाले को लेकर सरकार की नीयत पर सवालिया निशान लगाते हुए जमकर आवाज उठाई थी।

  • तोड़ दिया गया था श्मशान घाट-

बल्लभगढ़ में एक श्मशान घाट को घटिया क्वालिटी से बनाया जा रहा था। उसे पार्षद दीपक चौधरी के उठाने के बाद पूरी तरह से तोड़ दिया गया। मगर जिन घोटालों को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही है, उस पर लीपा पोती कर दी गई। फाईनेंस कंट्रोलर विशाल कौशिक पर आरोप लगाए गए कि उन्होंने इस घोटाले में भूमिका निभाई। मगर असल सवाल तो यह है कि नीचे से लेकर ऊपर तक की चेन में फाईनेंस कंट्रोलर की अपनी कोई भूमिका नहीं होती। ना ही वह अपने स्तर पर किसी को कोई पेमेंट जारी कर सकता है।

  • मिलीभगत से होते हैं घोटाले-

बल्लभगढ़ में हुए घोटालों में नीचे से लेकर ऊपर तक सभी की मिलीभगत होगी, तभी उसे अंजाम दिया जा सकता है। पहली सीढ़ी जूनियर इंजीनियर से शुरू होती है। उसके द्वारा बनाए गए बिलों को एसडीओ, एक्सईएन पास करते हुए एसई के पास भेजते हैं। इंजीनियरिंग ब्रांच से होते हुए ये बिल ऑडिट विभाग में जाते हैं, जहां कई अधिकारिक स्तर पर पास होते हुए बिल फाईनेंस विभाग में पहुंचते हैं। इस पूरी कड़ी में इंजीनियरिंग व ऑडिट विभाग की मुख्य भूमिका होती है। इन दोनों विभागों के अधिकारी ही निर्धारित करते हैं कि काम पूरा व सही होने के बाद ही बिल पास किए जाएं या नहीं। ऑडिट महकमे के बाद ही बिल फाईनेंस बिल में पहुंचता है।

  • फाईनेंस विभाग में होती है बिलों की जांच-

फाईनेंस विभाग में भी कई अधिकारी बिलों की परख करते हुए फाईनेंस कंट्रोलर तक पहुंचाते हैं। इसके बाद अंतिम स्वीकृति कमिशनर के पास जाती है। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद चैक पर कमिश्नर व फाईनेंस कंट्रोलर के हस्ताक्षर होने के बाद ही भुगतान जारी होता है। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि इस पूरे प्रकरण में अकेला फाईनेंस कंट्रोलर कैसे जिम्मेदार हो सकता है और उसकी सीधी भूमिका कहां दिखाई देती है। लेकिन इस एक अधिकारी के निलंबन से यह साफ हो गया है कि ऊपर बैठे अधिकारी व राजनेता अपनी पोल खुलने के डर से बाकि अधिकारियों को बचाने का काम कर रहे हैं। कांग्रेस की मांग है कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए।

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