संतोष अस्पताल के अवैध निर्माण में किस अधिकारी ने कमिश्नर के नाम पर लिए दस लाख रुपए ?

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एनआईटी नंबर -3 में बिजली निगम के दफ्तर के सामने बनाए जा रहे एक बड़े व्यवसायिक अवैध निर्माण में लाखों की डील किस अधिकारी व किस ठेकेदार ने करवाई, यह सवाल नगर निगम आयुक्त के संज्ञान में भी आने लगा है। निगम के ही एक अधिकारी ने संतोष अस्पताल के इस बड़े अवैध निर्माण को बनवाने में बड़ी भूमिका निभाई है। इसके एवज में वहां से दस लाख रुपए की डील होने की खबर चर्चा बनी हुई है। निगम आयुक्त के पास लगातार इस अस्पताल के अवैध निर्माण की शिकायत पहुंच रही है।

  • ग्रीवेंस कमेटी में लगेगी इस अवैध निर्माण की शिकायत-

बताया गया है कि शिकायतकर्ता ने अब सीधे तौर पर इस अस्पताल के अवैध निर्माण की शिकायत ग्रीवेंस कमेटी में लगाने की तैयारी कर ली है। इसके लिए वह उपायुक्त के माध्यम से अपनी शिकायत ग्रीवेंस कमेटी में रखेगा। इससे पहले वह सीएम विंडो पर भी यह शिकायत दर्ज करवा चुका है। लेकिन निगम के एक अधिकारी ने दस लाख रुपए की डील के बाद सीएम विंडो की शिकायत को रद्दी की ठोकरी में फेंक दिया है।

  • अवैध निर्माणों का सरंक्षक है ये अधिकारी-

बता दें कि आयुक्त को भी अब इस पूरे मामले की जानकारी हो चुकी है। निगम का कौन सा अधिकारी शहर में अवैध निर्माण माफियाओं का सरँक्षक बना हुआ है। इसके चलते ही उन्होंने बल्लभगढ़ से बिल्डिंग इंस्पेक्टर सुमेर सिंह को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। सुमेर सिंह को बल्लभगढ़ के अलावा बडख़ल का भी चार्ज दिया गया है। यही वजह है कि सुमेर सिंह ने वीरवार को एनआईटी नंबर-5 में कई अवैध निर्माणों को अच्छी तरह से तोड़ दिया, जबकि यह दूसरा अधिकारी सभी अवैध निर्माणों को बचाने के चक्कर में लगा हुआ था। बताया जाता है कि अब संतोष अस्पताल के साथ बन रहे अवैध निर्माण पर भी ग्रहण लगता दिखाई देने लगा है। वहां से दस लाख रुपए की डील की खबर निगम आयुक्त से लेकर लोकल बॉडी मंत्री तक भी पहुंच गई है।

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