फरीदाबाद की भी है राममंदिर निर्माण में मुख्य भूमिका, देंखे कैसे जान पर खेलकर अयोध्या पहुंचे थे कारसेवक

0
Faridabad News (citymail news ) 5 अगस्त को भगवान राम का मंदिर बनने का शुभ कार्य शुरू होने जा रहा है। यह शुभ घड़ी सैकड़ों बलदानियों  के प्रताप से और  लाखों राम भक्त कारसेवकों के प्रयास से आई है। इस राम काज में फरीदाबाद से भी कई कारसेवकों ने दो बार अयोध्या जाकर श्री राम जन्मभूमि आंदोलन में भाग लेकर अपना योगदान दिया है। प्रमुख समाज सेवी व संघ के प्रथम वर्ष शिक्षित स्वयंसेवक कैलाश शर्मा ने बताया है कि जिस तरह राम सेतु निर्माण में गिलहरी ने अपनी भूमिका निभाई  उसी प्रकार उनका व फरीदाबाद के 120 कार सेवकों का थोड़ा सा प्रयास रहा है।   उन्होंने बताया कि प्रथम प्रयास तब हुआ जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह थे। हरियाणा से आए हैं मंदिर वहीं बनाएंगे उदघोष के साथ फरीदाबाद जिले से उस समय के संघ जिला प्रचारक विजय  के मार्गदर्शन में फरीदाबाद से 60 और मेरे गांव कस्बा जट्टारी जिला अलीगढ़ से भी 60 कार सेवक कुल 120 कारसेवकों का जत्था मानव सेवा समिति के संस्थापक शुभकरण साबू के नेतृत्व में अयोध्या गया था।
  • एनआईटी से रवाना हुआ था जत्था-

एनआईटी स्थित वैश्य भवन में सभी का सार्वजनिक अभिनंदन करके अयोध्या के लिए रवाना किया गया। यह जत्था नई दिल्ली से लखनऊ उसके बाद लखनऊ से फैजाबाद की ट्रेन में बैठकर अयोध्या के लिए प्रस्थान किया। लेकिन फैजाबाद से पहले ही मानकपुर रेलवे स्टेशन पर सभी 120 कारसेवक उतर गए बाद में पुलिस को पता चल गया और सभी को एक इंटर कॉलेज में जाकर के पुलिस निगरानी में ठहराया गया । 2 दिन तक वहीं पर रहे वहीं पर शाखा लगाई भजन कीर्तन किया बाद में सभी को दो बसों में नैनी जेल के लिए ले जाया गया। लगभग 100 किलोमीटर जाने के बाद बस को एक होटल पर सभी को चाय पानी पिलाने के लिए रोका गया। हमने सोचा कि नैनी जेल के अंदर जाकर के फिर कैद हो जाएंगे क्यों ना अयोध्या जाने का अभी भी प्रयास किया जाए।
  • पुलिस को चकमा देकर हुए थे फरार-

अपनी इस आकांक्षा में मैंने अपने  सखा व जिला कार्यवाह बलवीर जी, स्वयंसेवक अनिल सचदेवा और मेरे गांव के एक कारसेवक को शामिल किया और वापस बस में ना बैठ कर वहां से नौ दो ग्यारह हो गए। और चुपके चुपके एक हिंदू परिवार के घर पहुंच कर रात्रि विश्राम किया। वाकी के कारसेवक नैनी जेल पहुंचा दिए गए। हम चारों ने जय श्री राम का नाम लेकर अगले दिन सुबह से अयोध्या के लिए 200 किलोमीटर की पदयात्रा छुपते छुपाते गांव के पहरेदार की निगरानी में मेन सड़क को छोड़कर  खेत, खलियान के रास्ते एक हफ्ते में पूरी की। क्योंकि चारों तरफ पुलिस का पहरा था पुलिस कुर्ता पजामा पहनने वाले, तिलक लगाने वाले, कंधे पर तोलिया डालने वालों को पकड़ रही थी। अतः हमें थेली में मूली गाजर ,आलू, टमाटर आदि रखने पड़ते थे और कोई भी जानकारी लेने के लिए पहले यह सुनिश्चित करना होता था कि जानकारी देने वाला पक्का हिंदू है ,सनातनी है और राम भक्त है। कई जगह गांव  वाले हमको गौशाला  या गोदाम में रात्रि को छुपाते थे। लेकिन उन्होंने बहुत ही प्यार व मान सम्मान दिया ।
  • जय श्रीराम बोलते बोलते किसी तरह अयोध्या की सीमा में पहुंचे

आगे की यात्रा पर जाने से पहले तिलक लगाकर अभिनंदन करते थे और एक व्यक्ति के साथ अगले गांव की सीमा तक पहुंचाते थे। जय श्रीराम बोलते बोलते किसी तरह अयोध्या की सीमा में पहुंचे लेकिन सभी कारसेवकों के साथ-साथ हमको भी बाबरी ढांचे से 1 किलोमीटर की दूरी पर रोक लिया गया । कारसेवकों ने विरोध तो बहुत किया लेकिन चारों तरफ पुलिस ही पुलिस थी वह भी कई वर्दी वाली। उसके बाद पता चला कि कारसेवकों पर गोली चला दी गई है और कई कारसेवक शहीद हो गए हैं । अफरा तफरी के माहौल में कारसेवको को जबरदस्ती रोडवेज की बसों में बैठाकर के अयोध्या से 100 किलोमीटर की दूरी पर छोड़ दिया गया । हमें भी लखनऊ छोड़ दिया गया और हम फरीदाबाद वापस आ गए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here