फरीदाबाद में अवैध निर्माणों की आड़ में लूट, एक अवैध निर्माण रोका तो दो शुरू हो गए

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Faridabad News (citymail news ) फरीदाबाद में तेज गति से अवैध निर्माण बढ़ रहे हैं, जिस वजह से लोगों को पार्किंग की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। पंरतु नगर निगम के अधिकारियों को इससे कोई लेना देना नहीं है। वह रुपयों के लालच में इस शहर का सत्यानाश करने पर तुले हैं। निगम आयुक्त यश गर्ग को ईमानदार अधिकारी के तौर पर जाना जाता है, मगर वह भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। जिसके चलते अधिकारियों ने अवैध निर्माणों के नाम पर लूट मचा रखी है। शहर में जहां देखो वहीं अवैध निर्माण धड़ल्ले से होते मिल जाएंगे। हैरत की बात है कि अधिकारी सब कुछ जानते हैं, मगर आंखों पर नोटों की पट्टी बांध रखी है। यही वजह है कि अवैध निर्माण करने वाले माफियाओं के हौंसले बुलंद हैं।

  • एसडीओ ने एक अवैध निर्माण रोका और दो शुरू हो गए-

ताजा मामला है एनआईटी 1 नंबर स्थित के. ब्लाक प्लाट नंबर 93 का, जहां हाल ही में एक बड़ा अवैध निर्माण शुरू हुआ है। मजे की बात तो यह है कि इस अवैध निर्माण को रूकवाने के लिए तोडफ़ोड़ विभाग के एसडीओ पदम भूषण खुद मौके पर गए। उनका दावा है कि उन्होंने यह अवैध निर्माण रूकवा दिया था। लेकिन स्थिति उस समय आश्चर्य चकित करने वाली दिखाई दी, जब यह निर्माण तो रूका नहीं बल्कि वहां एक और दूसरा बड़ा अवैध निर्माण भी शुरू हो गया। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि एसडीओ साहब ने कैसे यह अवैध निर्माण रूकवाया कि वहां एक की बजाए दो अवैध निर्माण शुरू हो गए।

  • बेचारे दुकानदारों पर चला दिया बुलडोजर-

यह तो एक उदाहरण मात्र है तोडफ़ोड़ विभाग की कार्यप्रणाली का। एनआईटी में अब मौजूदा बडख़ल विधानसभा क्षेत्र के नंबर 1 से लेकर नंबर 5 तक जमकर अवैध निर्माण हो रहे हैं। हालांकि पिछले दिनों नगर निगम के अधिकारियों ने एनआईटी नंबर -5 में पीला पंजा चलाया था। यह पंजा अवैध निर्माणों की बजाए लॉकडाऊन के दौरान मंदी की मार से जूझ रहे दुकानदारों के छज्जों पर चला दिया। हालांकि इन छज्जों से शहरवासियों को कोई दिक्कत नहीं थी। मगर इसके बावजूद अवैध निर्माणों को बचाने के लिए जानबूझकर सरकार व आयुक्त की आंखों में धूल झोंकने के लिए दुकानदारों के छज्जे तोड़ दिए गए। इससे शहर के लोगों में काफी गुस्सा है। हैरत की बात है कि एनआईटी नंबर 5 में जहां दुकानदारों पर बुलडोजर चलाए गए, वहीं कई बड़े अवैध निर्माण भी बन रहे हैं। मगर अधिकारियों ने उनकी ओर देखा तक नहीं। इससे जाहिर होता है कि अधिकारियों की मंशा कितनी साफ सुथरी है।

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