लॉकडाऊन संकट: फरीदाबाद में ठप्प हुई फैक्ट्री को उठाकर ले गया अपने गांव

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Faridabad News (citymail news ) लॉकडाऊन के दौरान ठप्प हुए उद्योगों को फिर से चलाने के लिए उद्यमियों को महानगर छोडक़र गांवों का रूख करना पड़ रहा है। वह अपने पूरे के पूरे उद्योग उठाकर गांवों में स्थापित कर रहे हैं। ऐसा ही एक बड़ा मामला एशिया की सबसे बड़ी औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में देखने को मिला है। गारमेंटस की एक फैक्ट्री इस महानगर से शिफ्ट होकर कुशीनगर पहुंच गई है। सुनने में बेशक यह खबर बेहद ही शाकिंग हो सकती है, मगर हकीकत में इसे एक युवा उद्यमी ने साकार कर दिखाया है।

  • पांच साल पहले लगाई थी फैक्ट्री-

फरीदाबाद में पांच साल पहले स्थापित गारमेंट फैक्ट्री को शुक्रवार को कुशीनगर में शिफ्ट कर दिया गया। युवा उद्यमी रविशंकर तिवारी ने कड़ी मेहनत के बाद फरीदाबाद में इस उद्योग को स्थापित किया था। उसकी टर्नओवर एक करोड़ रुपए तक पहुंच गई थी। मगर लॉकडाऊन में रविशंकर तिवारी की मेहनत पर पानी फिरता नजर आया, जब उसका उद्योग ठप्प पड़ गया। लेबर अपने गांव चली गई और काम करने के लिए उद्योग में कुछ बचा नहीं। तब रविशंकर तिवारी ने अपने उद्योग को ही गांव में ले जाने की योजना तैयार की। हालांकि यह बेहद मुश्किल काम था, मगर रविशंकर ने बिना हिम्मत हारे इसे साकार कर दिखाया। इसके लिए उसने पहले अपने श्रमिकों से भी सहमति ली और बकायदा पूरा सर्वे भी किया।

  • फरीदाबाद से जाने वाली पहली है ये फैक्ट्री-

फरीदाबाद में यह पहली फैक्ट्री है, जिसे लॉकडाऊन की मार झेलते हुए बाहर शिफ्ट होना पड़ा है। इस फैक्ट्री की मशीनें और अन्य सामान 6 ट्रकों में भरकर ले जाया गया है। रविशंकर का मकसद दीवाली से पहले फैक्ट्री का शुभारंभ और होली से पहले बाजार में अपना उत्पादन उतारने की योजना है। शहर से 24 किलोमीटर दूर पनियहवा रोड पर स्थित नारायणपुर गांव निवासी युवा उद्यमी रविशंकर तिवारी ने पांच साल पहले फरीदाबाद में यहां उत्पादन शुरू किया था। लॉकडाऊन से पहले तक फैक्ट्री का टर्न ओवर एक करोड़ रुपए तक पहुंच गया था। लेकिन अब रविशंकर ने पनियहवा रोड किनारे अपनी खेती की जमीन पर फैक्ट्री के लिए भवन निर्माण शुरू करवाने की तैयारी कर ली है। तिवारी की फैक्ट्री में जींस, पैंट-शर्ट व लोअर बनाए जाते हैं।

  • गांव में मिलेगा बड़ा लाभ-

रविशंकर तिवारी का मानना है कि गांव से ही वह अपनी फैक्ट्री को चलाकर फायदे में रह सकते हैं। जीएसटी नंबर पुराना रहेगा, उसका पता नया हो जाएगा। पहले भी वह सारा माल पूर्वाचंल में बेचा करते थे, अब भी उनकी सेल वहीं होगी। गांव में उनका बिजली बिल भी कम आएगा। फैक्ट्री में ही श्रमिकों के लिए कुछ आवास बना दिए जाएंगे। जबकि फरीदाबाद में उन्हें किराए के तौर पर ही दो लाख रुपए देने पड़ते थे। उनका कच्चा माल गुजरात और दिल्ली से आता है, अब भी वहीं से सारा माल आसानी से मंगवा लेंगे। मशीनों की रिपेयरिंग कंपनी कहीं भी जाकर करवा देती है। फरीदाबाद में वह 20 हजार पीस हर महीने बेचते थे, मगर अब उनका लक्ष्य 35 हजार पीस बेचने का रहेगा। फिलपकार्ड व अमेजन पर ऑनलाईन बिक्री के लिए भी उनकी कपंनी रजिस्टर्ड है। इस समय वह अपना सारा माल ऑनलाईन ही बेच रहे हैं। साभार- लाईव हिन्दुस्तान:

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