अजीब दादागिरी: फीस वसूल करके भी टीचरों को वेतन नहीं दे रहे प्राईवेट स्कूल

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Faridabad News (citymail news ) हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने कहा है कि स्कूल प्रबंधक फीस ना आने का बहाना करके अपने अध्यापकों को वेतन नहीं दे रहे हैं और उन्हें स्कूल से हटा रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार अप्रैल से जून महीने की फीस जमा करा दी है। इसके अलावा स्कूल प्रबंधकों ने 8 महीने पहले किए गए नए  दाखिलों में ही एडवांस में हजारों रुपए लेकर करोड़ों रुपए कमा लिए हैं जबकि नए बच्चों ने अभी तक स्कूल की शक्ल भी नहीं देखी है। स्कूलों के पास काफी रिजर्व व सरप्लस फंड्स भी है उसके बावजूद स्कूल प्रबंधक अपने अध्यापक व कर्मचारियों को तनख्वाह न देकर उनका आर्थिक व मानसिक शोषण कर रहे हैं।

  • आरटीआई लगाकर मांगी जानकारी-

मंच की ओर से सीबीएसई व हरियाणा बोर्ड को आरटीआई लगाकर फरीदाबाद के प्राइवेट स्कूलों द्वारा जनवरी 2020 से लेकर जून 2020 तक अभिभावकों से हर प्रकार से वसूली गई  फीस, स्कूल की अन्य आमदनी, स्कूल के पास मौजूद रिजर्व व सरप्लस फंड की तथा अध्यापकों को दी गई तनख्वाह व अन्य मदों में किए गए खर्च के ब्योरे की जानकारी मांगी है। मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा व  प्रदेश संरक्षक सुभाष लांबा ने बताया है कि मंच की ओर से 24 जून को सीबीएसई कार्यालय प्रीत विहार दिल्ली में आरटीआई लगाकर उपरोक्त जानकारी मांगी गई है जो अभी तक प्राप्त नहीं हुई है अगर 30 जुलाई तक मांगी गई जानकारी प्राप्त नहीं हुई तो प्रथम अपील अधिकारी के पास प्रथम अपील लगाकर जानकारी  दिलाने के लिए कहा जाएगा उसके बाद भी अगर जानकारी नहीं मिली जो केंद्रीय सूचना आयोग नई दिल्ली का सहारा लिया जाएगा।

  • तीन, चार महीने से कोई तनख्वाह नहीं मिली

मंच के जिला अध्यक्ष एडवोकेट शिव कुमार जोशी व सचिव डॉ मनोज शर्मा ने कहा है कि प्राइवेट स्कूलों के कई अध्यापकों ने मंच को जानकारी दी है कि उन्हें पिछले तीन, चार महीने से कोई तनख्वाह नहीं मिली है। तनखा मांगने पर परेशान किया जा रहा है यहां तक कि कई अध्यापकों को निकाल भी दिया गया है। आगे रोजगार न मिलने की मजबूरी से अध्यापक मजबूर होकर स्कूल प्रबंधकों के शोषण को सहन कर रहे हैं जब कि वे ऑनलाइन पढ़ाई करा कर पहले से ज्यादा समय दे रहे हैं। मंच ने अब उनकी मदद करने का बीड़ा उठाया है। इसी हेतु स्कूलों की आमदनी व खर्चे का ब्यौरा आरटीआई के तहत मांगा गया है जिससे सच्चाई सामने आ सके।

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