MCF का बड़ा घोटाला: काम 30 करोड़ का और हड़प गए 80 करोड़, कहां गए 50 करोड़

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Faridabad News (citymail news ) फरीदाबाद का नगर निगम भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुका है। निगम में हर ईंट के नीचे भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार मिलेगा। अब एक और ताजा मामला सामने आया है। बताया गया है कि नगर निगम की इंजीनियरिंग विभाग व एकाऊंट ब्रांच की मिलीभगत से कुछ ठेकेदारों को 30 करोड़ रुपए का काम करने की एवज में 80 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया है। यह बड़ा मामला सामने आते ही फरीदाबाद से लेकर चंडीगढ़ तक हडक़ंप मच गया है। हैरत की बात तो यह है कि इस भ्रष्टाचार की जड़ में बैठे इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी पूरी मौज ले रहे हैं। उन्हें राजनेताओं से लेकर अधिकारियों का सरंक्षण हासिल है। वह लगातार प्रमोशन पर प्रमोशन ले रहे हैं, उनकी करतूतों पर पर्दा डालने वाले अधिकारी ही उन्हें बचा रहे हैं। यही नहीं बल्कि कई राजेनताओं की भी इस गौरखधंधे में मिलीभगत की कहानी सामने आ रही है। निगम की इंजीनियरिंग शाखा के अधिकारी फरीदाबाद से लेकर वाया दिल्ली व चंडीगढ सब कुछ मैनेज करते हैं। बड़े भ्रष्टाचार की एवज में लाखों रुपए की भेंट पूजा चंडीगढ़ तक पहुंचाई जाती है।

  • ठप्प पड़ी है स्टेट विजिलेंस ब्यूरो की जांच

हैरत की बात है कि भ्रष्टाचार की एवज में स्टेट विजिलेंस ब्यूरो द्वारा जांच तो शुरू की जाती है, मगर उसका अंत नहीं होता। यानि कि अधिकारी वहां भी सब कुछ मैनेज कर लेते हैं। फरीदाबाद की इस परियोजनाओं को लेकर विजिलेंस की जांच चल रही हैं, लेकिन उसकी रिपोर्ट कई साल बाद आज तक भी नहीं आई है। पता चला है कि विजिलेंस जांच में घिरे कई अधिकारियों को बड़ी प्रमोशन दी जा रही हंै। उनकी फाईल मुख्यमंत्री दरबार में हैं और माना जा रहा है कि बहुत जल्द उन्हें प्रमोशन भी मिल जाएंगी। यानि कि इन अधिकारियों को बड़े बड़े पदों पर बिठाए जाने की तैयारी है। यह है भाजपा सरकार का सुशासन। भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी इस सरकार के कोहिनूर बन गए हैं।

  • सुर्खियां बटोर रहा है यह घोटाला-

लेकिन यहां बात करें नगर निगम फरीदाबाद की तो 50 करोड़ रुपए का यह घोटाला खासी सुर्खियां बटोर रहा है। इस घोटाले को लेकर सीएम विंडो पर एक शिकायत लगाई गई है। जिसमें कहा गया है कि फरीदाबाद के विभिन्न इलाकों में करीब 30 करोड़ रुपए के काम हुए हैं, जिनकी एवज में भुगतान 80 करोड़ रुपए का किया गया है। सीएम विंडो पर जिन ठेकेदारों को भुगतान किया गया है, उनमें नाम भी बताए गए हैं। इनमें से कईयों को दो बार भी भुगतान करने की शिकायत दी गई है। इस शिकायत पर आयुक्त यश गर्ग का कहना है कि वह इस मामले की जांच विजिलेंस से करवाएंगे। सारा मामला सरकार को भेजा जाएग। वहां से जैसे भी दिशा निर्देश मिलेंगे, उस पर अमल किया जाएगा।

  • आरटीआई एक्टिविस्ट विष्णु गोयल ने भी खोली पोल-

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट विष्णु गोयल का कहना है कि ई टेंडर, एस्टीमेट और बिल करीब 70 प्रतिशत तक फर्जी होते हैं। इनके माध्यम से ही करोड़ों व अरबों रुपए के घोटाले किए गए हैं और जारी भी हैं। सीवर सफाई की आड़ में बड़े पैमाने पर घोटाले हो रहे हैं। इंजीनियरिंग विभाग सबसे बड़ा घोटालों का अड्डा है। यदि निगम में काम कर चुके व मौजूदा अधिकारियों की जांच करवाई जाए तो वहां से बड़े व हैरान करने वाले घोटाले सामने आ सकते हैं। इन अधिकारियों ने बेहताशा दौलत अर्जित कर ली है। यदि इन अधिकारियों की व्यक्तिगत संपत्तियों की जांच करवा ली जाए तो सारा मामला अपने आप सामने आ जाएगा।

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