सत्ता के विवाद का अंत: पायलट बाहर, गहलौत ने दिखाई ताकत, बर्खास्त होंगे 18 विधायक

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Japur News (citymail news ) प्रियंका गांधी के बीच बचाव के बावजूद राजस्थान का विवाद सुलझने की बजाए और अधिक बढ़ गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलौत ने डिप्टी सीएम सचिन पायलट सहित उनके दो कद्दावर समर्थक मंत्रियों को भी सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। पायलट को डिप्टी सीएम के साथ साथ कांग्रेस अध्यक्ष के पद से भी हटा दिया गया है। उनके साथ विश्वेंद्र सिंह एवं रमेश मीणा को भी मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया है। इसके अलावा पायलट के सभी समर्थक 18 विधायकों को भी बर्खास्त किए जाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री अशोक गहलौत ने मंगलवार की सुबह अपने सभी विधायकों की बैठक लेकर उनके समर्थन की ताकत दिखाकर बता दिया है कि उनकी गद्दी को कोई खतरा नहीं है। बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर सचिन पायलट समर्थक विधायकों को नोटिस जारी कर उन पर कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।

इस बीच सियासी संकट के चलते पायलट की प्रदेश अध्यक्ष पद से छुट्टी के बाद राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह को नया अध्यक्ष बनाया गया है। युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को भी हटा दिया गया है, वह भी पायलट समर्थकों में शामिल थे। वहीं कांग्रेस से बाहर होने के बाद पायलट ने एक टवीट किया है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा है कि सत्य परेशान हो सकता है, मगर पराजित नहीं।

सचिन पायलट को मनाने की भरपूर कोशिश की

हालांकि इससे पहले सचिन पायलट को मनाने की भरपूर कोशिश की गई थी। इसकी जिम्मेदारी खुद प्रियंका गांधी ने ली थी। उनके साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने भी अपने स्तर पर सचिन से बात की थी। लेकिन सचिन अपनी जिद्द पर अड़े रहे । वह और उनके समर्थक विधायक अशोक गहलौत को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग कर रहे थे। इसके चलते राजस्थान विवाद का हल प्रियंका गांधी भी नहीं कर पाई। इसके बाद मंगलवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सचिन पायलट को बाहर का रास्ता दिखाने पर सहमति बनाई और तत्काल इसका फैसला सुना दिया। गहलौत ने कहा कि सरकार के लिए 101 विधायकों की जरूरत है, जबकि उनके पास 109 विधायकों का समर्थन है। इस उठापटक के बाद अब गहलौत को एक बार फिर से अपनी सरकार का समर्थन साबित करना होगा। माना जा रहा है कि एकाध दिन में गहलौत इस परीक्षा को भी पास करने की दिशा में कदम बढ़ा देंगे।

चला आ रहा था पुराना विवाद-

गहलौत व पायलट के बीच सरकार बनने के बाद से तनातनी चल रही थी। यह विवाद धीरे धीरे बढ़ता गया। पायलट व उनके समर्थकों ने अपनी उपेक्षा को लेकर आरोप लगाने शुरू कर दिए थे। पायलट का आरोप है कि उन्हें और उनके समर्थकों को सरकार में बेइज्जत किया जा रहा था। यह अब सहन करने लायक नहीं रह गया था। इसलिए उन्हें गहलौत का विरोध करने का यही तरीका सही लगा और उन्होंने किया भी। माना जा रहा है कि पायलट और उनके समर्थक भाजपा की ओर जा सकते हैं। वहीं कईयों का कहना है कि पायलट अपनी अलग पार्टी भी बना सकते हैं।

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