राजस्थान के राजनैतिक संकट में प्रियंका की एंट्री, गहलौत ने दिखाया अपना दम

0

Jaipur News (citymail news ) राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलौत व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच चल रहे विवाद में प्रियंका गांधी ने सीधी एंट्री ली है। उन्होंने इस विवाद को समाप्त करने के लिए जहां गहलौत से बात की, वहीं सचिन पायलट से भी उनकी वार्ता हुई है। माना जा रहा है कि दोनों के बीच का विवाद प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप के बाद सुलझ सकता है। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री अशोक गहलौत ने अपने सरकारी आवास पर मीडिया के सामने 101 विधायकों की परेड करवाई। इन विधायकों के जरिए गहलौत यह साबित करने में सफल रहे हैं कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है।

गहलौत ने किया शक्ति प्रदर्शन-

गहलौत के शक्ति प्रदर्शन में पायलट खेमे के भी कुछ विधायकों के पहुंचने की खबर है। दूसरी ओर पायलट के पास अब विधायकों की पहले से कमी हो गई है। रविवार तक वह 30 विधायकों के समर्थन की बात कर रहे थे। इस दौरान उनकी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी बात हुई। उनके बीच पुल का काम मध्यप्रदेश भाजपा के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया। पंरतु सोमवार को बाजी पलटी हुई दिखाई दी। सचिन पायलट ने भाजपा में जाने की बजाए अपनी खुद की पार्टी बनाने के संकेत दिए हैं। लेकिन जैसे जैसे समय बढ़ता गया, वैसे वैसे कांग्रेस में इस उठापटक को शांत करने के प्रयास तेज हो गए। प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप के बाद गहलौत व सचिन के बीच सुलह की संभावना दिखाई देने लगी है। यही वजह है कि राजस्थान के अनेक शहरों से हटाए गए सचिन पायलट के फोटो फिर से टांगी जाने लगी हैं। इससे सुलह के तौर पर देखा जा रहा है।

सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचे विधायक-

वहीं अशोक गहलौत ने अपने सभी विधायकों को सुरक्षित स्थान पर भेजना शुरू कर दिया है। मुंबई से कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने भी पार्टी नेताओं से पायलट को मनाने की अपील की। इसी तर्ज पर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने जयपुर पहुंचकर सचिन पायलट से वापिस आने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि पायलट को मुख्यमंत्री गहलौत से कोई शिकायत है तो वह पार्टी प्लेटफार्म पर उसे उठा सकते थे। लेकिन पार्टी छोडक़र जाना कोई समाधान नहीं है। इस बीच भाजपा की इस पूरे घटनाक्रम पर नजरें लगी हुई हैं। अभी तक भाजपा का इस विवाद पर कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर ने जरूर कांग्रेस के इस कलह पर चुटकी ली और गहलौत की कार्यप्रणाली पर कटाक्ष किया। माथुर ने कहा कि गहलौत अपनी सरकार चलाने में फेल साबित हो रहे हैं।

सरकार बनाने के लिए चाहिए इतने विधायक-

बता दें कि राजस्थान में सरकार बनाने के लिए 101 विधायकों का बहुमत चाहिए। कांग्रेस के अपने वहां 100 विधायक हैं, इसके अलावा उनके पास निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन है। जबकि भाजपा के पास राजस्थान में 73 विधायक हैं। कांग्रेस के पास अपने 100 विधायक हैं, मगर गहलौत का दावा है कि सरकार को कोई खतरा नहीं है। उनके पास 109 विधायकों का समर्थन हैं, जोकि विधानसभा में उनके पक्ष में मतदान व परेड करने के लिए तैयार हैं। इस स्थिति में फिलहाल सचिन पायलट का पलटा कमजोर दिखाई दे रहा है। रविवार तक वह 30 विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का दावा कर रहे थे। लेकिन सोमवार को उनके दावे उस वक्त कमजोर पड़ गए, जब उनके खेमे के करीब दस विधायक गहलौत निवास पर देखे गए। पता चला है कि धीरे धीरे सचिन पायलट को उनके विधायक छोडक़र जाने लगे हैं। वहीं गहलौत मजबूत स्थिति में दिखाई देने लगे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here