हो जाएं सावधान: नहीं तो घर बैठे लुट जांएगे आप, फिर खाते रहो इस पिता की तरह धक्के

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Faridabad News (citymail news ) आजकल साईबर क्राईम ने हर आदमी को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। फोन पर तरह तरह का लालच देकर वह लोगों को अपने जाल में फंसा लेते हैं और फिर फोन पर लिंक या मैसेज भेजकर ओटीपी नंबर लेकर बैंक खाते में पड़ी राशि को पूरी तरह से साफ कर देते हैं। साईबर क्राईम की दुनिया बहुत तेजी से विस्तार लेती जा रही है। साईबर अपराधी आपसे कोसों दूर बैठकर इस धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं। पुलिस के लिए भी उन्हें पकडऩा बहुत मुश्किल होता है। इसलिए अधिकांश मामलों में पुलिस द्वारा पीडि़त को केवल आश्वासन देकर टाल दिया जाता है। बैंक में भी साईबर क्राईम को लेकर ऐसी कोई सुविधा नहीं है। इसलिए बैंक अधिकारी भी क्राईम के इस तरीके को रोकने में नाकाम ही साबित हो रहे हैं।

ऐसी स्थिति में पीडि़त को इंसाफ मिलने की संभावना ना के बराबर रहती है। जिसके चलते वह दर दर की ठोंकरे खाता रहता है। इस मामले में भी पीडि़त पिता के साथ ऐसा ही हो रहा है। वह फरियाद लेकर एक से दूसरे दरवाजे पर दस्तक दे रहा है, मगर उसे इंसाफ नहीं मिल पा रहा है। उसके सामने दुविधा यह है कि वह अपनी बेटी की शादी को लेकर परेशान है। जिसके लिए जमा किए गए सारे रुपए अब अपराधियों के पास पहुंच चुके हैं। यह घटना घटित हुई है फरीदाबाद के सैक्टर 25 में रहने वाले दीपक भटनागर के साथ। दीपक के अनुसार उसे आईडिया कंपनी से एक फोन आया, जिसमें कहा गया कि वह अपना 3 जी इंटनेट को घर बैठे ही 4 जी में बदलवा लें। नहीं तो आपका फोन बंद हो जाएगा। इसके लिए उनसे कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा और ना ही उन्हें कहीं चक्कर लगाने होंगे। इस फोन को सुनने के बाद दीपक इसके लिए तैयार हो गए। उन्होंने 4 जी इंटरनेट सुविधा लेने के लिए अपनी सहमति दे दी।

तभी उनके पास वहां से एक मैसेज आया और दीपक से उसका रिप्लाई करने के लिए कहा गया। जैसे ही दीपक ने मैसेज का रिप्लाई किया तो उसके पूरे बैंक खाते की जानकारी साईबर अपराधियों के पास पहुंच गई। देखते ही देखते उसके आईसीआईसीआई बैंक खाते से चौबीस घंटे के भीतर 3 लाख 46 हजार रुपए उड़ा लिए गए। दरअसल दीपक ने यह रकम अपनी बेटी की अक्टूबर में होने वाली शादी के लिए जमा किए थे। जोकि देखते ही देखते साईबर क्राईम की भेंट चढ़ गए। दीपक ने अपने साथ घटित हादसे की जानकारी पुलिस व बैंक को भी दी। मगर अभी तक उसे कोई राहत भरी खबर नहीं मिली है। फिलहाल वह अपने रुपए वापिस पाने के लिए धक्के खा रहा है। उल्लेखनीय है कि समय समय पर पुलिस व बैंक द्वारा साईबर क्राईम से निपटने के लिए यह सूचना जारी की जाती है कि वह अपने फोन पर आने वाले मैसेज या ओटीपी की जानकारी किसी को भी ना दें। मगर इसके बावजूद लोग यह समझने को तैयार नहीं होते और साईबर अपराधियों के चंगुल में फंस जाते हैं।

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