सांसद बेटे के लिए गुर्जर का मंत्री पद हथियाने के चक्कर में हैं चौ.वीरेंद्र सिंह ?

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By – SANJAY KAPOOR
बेटे को मंत्री बनाने के चक्कर में पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह राजनीति की बिसात पर जमकर चालें चल रहे हैं। हरियाणा के हिसार से सांसद बेटे बृजेंद्र सिंह को वह किसी भी सूरत में मंत्री की कुर्सी पर बैठे हुए देखना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने खुद की कुर्सी छोड़ दी, इसके बावजूद राजा बेटे को मंत्री पद नहीं मिल पाया। सर छोटूराम की राजनैतिक विरासत को लेकर हरियाणा की राजनीति में अपने परिवार को स्थापित करने के एजेंडे पर वर्षों से काम कर रहे चौधरी वीरेंद्र सिंह अब किसी तरह से जुगाड़ करके अपने बेटे को सत्ता के भवन में बिठाकर आराम से राजनैतिक सन्यास लेना चाहते हैं।पिताजी की इच्छा पूरी करने के लिए उनके आईएएस बेटे ने अपनी अफसरी छोड़ दी और राजनीति के मैदान में कूद गए। अफसरी त्यागकर राजनेता बने बृजेंद्र सिंह भी राजनीति में अपने पिता के अधूरे सपने को पूरा करना चाहते हैं। चौधरी वीरेंद्र सिंह का पूरा परिवार एकजुट होकर हरियाणा की राजनीति में अपना वर्चस्व कायम करने की दिशा में काम कर रहा हैं। इसी कड़ी में चौधरी वीरेंद्र सिंह ने एक बड़ी चाल चली है। यदि उनकी चाल कामयाब रही तो शायद उनके सांसद पुत्र बृजेंद्र सिंह मंत्री बन जाएं। हरियाणा में इन दिनों भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को लेकर राजनीति जोरों पर है। प्रदेश के कई नेताओं के नाम अध्यक्ष की कुर्सी के लिए जोर शोर से चल रहे हैं। इनमें एक बड़ा और महत्वपूर्ण नाम है केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णापाल गुर्जर का। यह नाम हरियाणा की राजनीति में खासी सुर्खियों बटोर रहा है। श्री गुर्जर का नाम इस पद के लिए फिट माना जा रहा है। बस यहीं से चौधरी वीरेंद्र सिंह को श्री गुर्जर की तापपोशी में अपने बेटे का मंत्री पद दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि चौधरी साहब इन दिनों श्री गुर्जर के नाम की माला जप रहे हैं। उन्हें संभावना दिखाई दे रही है कि यदि गुर्जर प्रदेश अध्यक्ष बन गए तो उनका मंत्री पद से हटना तय है। केंद्रीय मंत्रीमंडल में एक कुर्सी खाली हुई तो वह उस पर अपने बेटे को बिठाने की जुगत में लग जाएंगे। इसलिए चौधरी साहब सारा काम छोडक़र गुर्जर को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की वकालत में लगे हैं। लेकिन वहीं दूसरी ओर गुर्जर ना तो इससे अंजान हैं और ना ही राजनीति के कच्चे खिलाड़ी। इसलिए उन्होंने भी दांव चल दिया है कि अध्यक्ष बनाना है तो बनाओ, मगर मंत्री पद छोडऩे की शर्त पर नहीं। गुर्जर ने इसे लेकर कह दिया है कि बेशक अध्यक्ष मत बनाओ, मगर वह मंत्री पद नहीं छोड़ेंगे। इसके लिए उन्होंने पंजाब के भाजपा अध्यक्ष विजय सांपला का उदाहरण आगे रख दिया है। सांपला मंत्री रहते हुए पंजाब भाजपा के अध्यक्ष का कार्यभार संभाले हुए हैं। यदि गुर्जर की शर्त मान ली गई तो चौधरी साहब का सपना फिर अधूरा रह सकता है। देखना अब यह है कि चौधरी वीरेंद्र सिंह की कृष्णपाल गुर्जर का मंत्री पद हथियाकर अपने बेटे को सत्ता में स्थापित करने की मंशा पूरी होती है या नहीं।

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