ब्रहमकुमारी शिवानी ने मानव रचना के जरिए बताए टेंशन फ्री रहने के टिप्स

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Surajkund News (citymail news ) बेहतर कल की कामना सब करते हैं, लेकिन आज के समय में सब स्ट्रेस के साथ जी रहे हैं. कोरोना-19 के दौरान यह मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं. इनका सामना कैसे किया जाए इस पर मानव रचना शैक्षणिक संस्थान की ओर से सिस्टर बीके शिवानी के साथ वेबिनार का आयोजन किया गया. इस दौरान करीब 3000 लोगों ने उनके विचार सुने. सिस्टर बीके शिवानी ने कहा, सोशल मीडिया पर बहुत दोस्त हैं लेकिन दिल की बात सुनने वाला कोई नहीं है. उन्होंने जिंदगी के तीन सबसे जरूरी पहलुओं के बारे में बात की, सेल्फ, फैमिली एंड वर्क. उन्होंने सभी से कहा कि वह मन में सोचें कि सबसे ज्यादा जरूरी क्या है और उसे पहले, दूसरे और तीसरे नंबर पर रखें. इससे साफ हो जाएगा कि हम जीवन को कैसे जीना चाहते हैं.   लोग आज के समय में किसी के सामने भी बोल देते हैं कि मरने की भी फुरसत नहीं है, वह यह नहीं जानते कि इसका असर क्या होगा. परिवार के साथ समय नहीं बिताते जिसे लेकर गिल्ट भी रहता है. उन्होंने कहा अगर आपको काम करना पसंद है और सारा समय वहीं जा रहा है फिर तो खुश होना चाहिए, लेकिन लोग स्ट्रेस लेते हैं. वह परिवार के लिए सब करते तो हैं लेकिन उन्हें सुकून नहीं मिलता न ही परिवारवाले उससे खुश रहते हैं क्योंकि हर चीज स्ट्रेस में की जाती है. जब तक आपका मन खुश नहीं होगा तब तक कुछ भी अच्छा नहीं होगा, इसलिए सबसे पहले अपने बारे में सोचें फिर किसी के लिए कुछ करें. सेल्फ, फैमिली और वर्क टाइम की बात नहीं है सिर्फ मन की बात है

बीके शिवानी ने कहा स्कूल में टॉपर्स को अवॉर्ड से सम्मानित किया जाता है, लेकिन सच बोलने वाले को सम्मानित नहीं किया जाता. स्कूल में सच बोलने वाले को भी अवॉर्ड दिया जाना चाहिए ताकी बच्चे सच्चाई के रास्ते पर चलें. उन्होंने कहा जीवन में नो एंगर जोन होना भी जरूरी है. ऐसा कहा जाता है जैसा मन वैसा तन, जैसा पानी वैसी वाणी. उन्होंने एमोश्नल इंडिपेंडेंस की भी बात की और कहा, आजकल हर छात्र यही चाहता है. कोई भी सिचुएशन बाहर आती है हमारा मन कैसे रिएक्ट करता है ये सिचुएशन पर नहीं डिपेंड होता बल्कि च्वाइस पर डिपेंड होता है. अगर हम लोगों के बिहेवियर पर रिएक्ट करेंगे तो हमारी शक्ति खराब हो जाएगी और हम एडिक्ट हो जाएंगे. इमोश्नल इम्यूनिटी सिस्टम को भी स्ट्रांग करना होगा जिसके लिए इमोश्नल इंडिपेंडेस जरूरी है इसके अलावा डॉ. ओपी भल्ला फाउंडेशन की ओर से भी सभी कर्मचारियों के लिए इंस्पीरेशनल सीरीज की शुरुआत की गई है. इस सीरीज को मानव रचना शैक्षणिक संस्थान की मुख्य संरक्षक सत्या भल्ला संबोधित कर रही हैं. हाल ही में आयोजित किए गए पहले संस्करण में उन्होंने अपने जीवन के बारे में बातें साझा की. उन्होंने बताया, किस तरह उनके पिता ने जीवन भर परिश्रम किया. उस जमाने की बातें बताई जब लड़कियों की शिक्षा के खिलाफ पूरा समाज होता था लेकिन वह रेवाड़ी  के अहीर कॉलेज में पढ़ी. उस वक्त कॉलेज में सिर्फ पाँच लड़कियां पढ़ती थी जिनमें से वह एक थी. उन्होंने कहा, परिश्रम जीवन का सबसे कीमती गेहना इससे पीछे न हटें. जीवन का सबसे सच्चा साथी आत्मविश्वास है. उन्होंने कहा आज विपदा का समय है लेकिन घबराएं नहीं, जिस तरह वह समय ज्यादा दिन नहीं रह पाया उसी तरह यह समय भी जल्दी बीत जाएगा. कोई भी हिम्मत न हारे. 

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